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न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी पुलिस के दम पर जमीन की नापी का आरोप; पीड़ित ने लातेहार SP से लगाई न्याय की गुहार

फर्जी दस्तावेज के सहारे रैयती जमीन हड़पने की कोशिश का आरोप, चंदवा थाना पुलिस के प्रभाव के इस्तेमाल की शिकायत

न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी पुलिस के दम पर जमीन की नापी का आरोप; पीड़ित ने लातेहार SP से लगाई न्याय की गुहार

फर्जी दस्तावेज के सहारे रैयती जमीन हड़पने की कोशिश का आरोप, चंदवा थाना पुलिस के प्रभाव के इस्तेमाल की शिकायत

चंदवा/लातेहार: चंदवा थाना क्षेत्र में रैयती जमीन को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। ग्राम पतराटोली, कामता निवासी पंचु पाहन, पिता- देवचरण पाहन ने लातेहार के पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद फर्जी दस्तावेज के आधार पर उनकी जमीन की नापी कराकर उसे हड़पने की कोशिश की जा रही है।

पीड़ित पंचु पाहन के अनुसार, उनकी रैयती भूमि CS खाता नंबर-10, CS प्लॉट नंबर-267 एवं 268 तथा वर्तमान खाता नंबर-84, प्लॉट नंबर-467, 468 एवं 470 में दर्ज है। कुल 1.43 एकड़ भूमि में से 24 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद बताया गया है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि कामता निवासी कुर्बान खान, पिता- अहलाद खान एवं अलौदिया निवासी राहुल सिंह, पिता- धर्मनाथ सिंह द्वारा कथित रूप से फर्जी केवाला के आधार पर जमीन की नापी कराकर उस पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।

पीड़ित ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में चंदवा थाना पुलिस के प्रभाव का इस्तेमाल कर जबरन जमीन की मापी कराने की कोशिश की जा रही है, जबकि संबंधित भूमि विवाद का मामला पहले से ही न्यायालय में लंबित है।

SP कार्यालय में दर्ज कराई शिकायत

इस मामले को लेकर पंचु पाहन ने 01 सितंबर 2026 को लातेहार पुलिस अधीक्षक कार्यालय के स्वागत कक्ष में आवेदन संख्या 1225/26 के तहत शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

पीड़ित का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी पुश्तैनी रैयती जमीन पर अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पीड़ित की मांग— हो निष्पक्ष जांच, बचे रैयती जमीन

पंचु पाहन ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच की जाए, दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो और उनकी रैयती जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अब इस मामले में पुलिस अधीक्षक स्तर से जांच और कार्रवाई के बाद ही साफ हो सकेगा कि न्यायालय में लंबित भूमि विवाद के बीच जमीन की नापी कराने का प्रयास किन परिस्थितियों में किया गया और पीड़ित के फर्जी दस्तावेज के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल, पीड़ित के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों का बयान सामने आना बाकी है।

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