
टेरर फंडिंग केस में बड़ा घटनाक्रम: झारखंड हाईकोर्ट से टंडवा के 7 दोषियों को जमानत, आधी से अधिक सजा काटने के आधार पर मिली राहत
मगध-अम्रपाली कोल परियोजना मामले में हाईकोर्ट का फैसला; एनआईए की विशेष अदालत ने पहले सुनाई थी 8 से 10 साल तक की सजा
टंडवा, चतरा: झारखंड के चतरा जिले के टंडवा स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े बहुचर्चित टेरर फंडिंग मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में दोषी ठहराए गए सात लोगों को जमानत प्रदान कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोषियों की ओर से सजा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जेल में सजा की आधी से अधिक अवधि बिताए जाने का आधार रखा गया था। इसी आधार पर अदालत से राहत मिली है।
जमानत पाने वालों में विनोद कुमार गंझू, विद्वेश्वर गंझू उर्फ बिंदु गंझू, बीरबल गंझू, भीखन गंझू, अमर सिंह भोक्ता, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और अनिरुद्ध गंझू शामिल हैं।
एनआईए की विशेष अदालत ने सुनाई थी 8 से 10 साल की सजा
इस मामले में रांची स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 18 अगस्त को 12 दोषियों को आठ से दस साल तक की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही अलग-अलग दोषियों पर 40 हजार से 90 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया था। विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दोषियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। इसी कानूनी प्रक्रिया के दौरान जमानत की मांग की गई थी।
2018 में एनआईए ने अपने हाथ में ली थी जांच
टेरर फंडिंग के आरोपों से जुड़े इस मामले में एनआईए ने 13 फरवरी 2018 को टंडवा थाना में दर्ज कांड संख्या 2/2016 की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान एजेंसी ने 16 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मामला मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं में कथित लेवी वसूली, कोयला ढुलाई के ठेकों और उग्रवादी संगठन को कथित आर्थिक मदद पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है।
टीपीसी को कथित फंडिंग के आरोप भी जांच के दायरे में
एनआईए की जांच में तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) को कथित तौर पर आर्थिक मदद पहुंचाने और कोयला परियोजनाओं से लेवी वसूली के आरोपों की पड़ताल की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कोयला ढुलाई के ठेकों और कथित सांठगांठ से जुड़े पहलुओं की भी जांच की गई थी।
हाईकोर्ट से राहत, लेकिन कानूनी लड़ाई जारी
सात दोषियों को जमानत मिलने से मामले में उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ दोषसिद्धि समाप्त होना या आरोपों से बरी होना नहीं है। सजा के खिलाफ दायर याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम महत्वपूर्ण रहेगा।
मगध-अम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े इस मामले पर अब आगे की अदालती कार्यवाही और हाईकोर्ट के आदेश की विस्तृत शर्तों पर नजर रहेगी।




