मगध कोल परियोजना में हुआ बड़ा खेल
सीसीएल पैकेज के लालच में रैयतों का खेल, जांच हुई तो बड़े खुलासे तय

मगध-संघमित्रा कोल परियोजना में नौकरी की ‘दलाली’! एक ही प्लॉट पर बिक रही कई नौकरियां
सीसीएल पैकेज के लालच में रैयतों का खेल, जांच हुई तो बड़े खुलासे तय
दैनिक आवाज न्यूज: झारखंड की मगध-संघमित्रा कोल परियोजना में नौकरी के नाम पर बड़े घोटाले की परतें खुलती नजर आ रही हैं। ताजा आरोपों के मुताबिक, कुछ रैयतों ने सीसीएल द्वारा दिए जा रहे भारी मुआवजा और नौकरी पैकेज के लालच में एक ही प्लॉट पर कई-कई लोगों को नौकरी दिलाने का खेल रच डाला है।
सूत्रों की मानें तो एक ही जमीन के कागजात के आधार पर अलग-अलग लोगों से सौदेबाजी कर नौकरियां “बेची” गई हैं। इस पूरे खेल में जमीन मालिक, बिचौलिए और सिस्टम के भीतर बैठे कुछ अधिकारी मिलकर नियमों को दरकिनार करते नजर आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि कागजी हेरफेर और रिकॉर्ड में बदलाव के जरिए एक ही प्लॉट को कई बार दिखाकर नौकरी का लाभ दिलाया गया। इससे न केवल असली हकदार रैयतों का हक मारा गया, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच हुई तो मचेगा हड़कंप:
अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच नीचे स्तर से लेकर उच्च स्तर तक की जाती है, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में नौकरी पाने वाले कई लोगों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
सिस्टम पर उठे सवाल:
एक ही प्लॉट पर कई नौकरियां कैसे स्वीकृत हुईं?
क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत यह संभव है?
असली रैयतों को दरकिनार कर किन लोगों को फायदा पहुंचाया गया?
जनता में आक्रोश:
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जिन परिवारों ने अपनी जमीन गंवाई, वे आज भी नौकरी के इंतजार में हैं, जबकि “जुगाड़ सिस्टम” वाले लाभ उठा रहे हैं।
मगध-संघमित्रा परियोजना में नौकरी के नाम पर चल रहा यह खेल अगर उजागर हुआ, तो यह सिर्फ एक घोटाला नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोल देगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पर कब और कैसे कार्रवाई करता है।




