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Ranchi: गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने JTET में स्थानीय भाषाओं को शामिल करने और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन,  

Ranchi: गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने JTET में स्थानीय भाषाओं को शामिल करने और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन,  

गढ़वा/रांची :

गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर एक ओर कूटकू मंडल डैम से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा उठाया, वहीं दूसरी ओर JTET (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) में स्थानीय भाषाओं को शामिल करने की भी मांग की है।

ज्ञापन में विधायक ने बताया कि विश्रामपुर बलीगढ़ पंचायत सहित लगभग 20 गांवों के आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग जंगल पर निर्भर होकर जीवन-यापन करते हैं। कूटकू मंडल डैम परियोजना के कारण करीब 780 परिवारों को विस्थापित किया जा रहा है, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने 8 दिसंबर को बिना ग्राम सभा की सहमति के पुलिस बल के साथ जबरन कार्रवाई की, जिसमें महिलाओं और पुरुषों के साथ मारपीट की गई। विधायक ने इस कार्रवाई को गलत और असंवैधानिक बताते हुए इसकी जांच की मांग की है।

विधायक ने राज्यपाल से मांग की है कि इन सभी विस्थापित परिवारों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बसाया जाए तथा उनके लिए समुचित पुनर्वास और सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित पंचायत ‘पैसा कानून’ के तहत संरक्षित नहीं होने के कारण इन परिवारों को कानूनी सुरक्षा भी नहीं मिल पा रही है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि लगभग 5000 लोगों के बेघर होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिनके न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। पत्र में संदर्भ संख्या 2031261KM का भी उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने एक अलग मांग में JTET परीक्षा को लेकर भी राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि गढ़वा, पलामू और लातेहार जिले के अभ्यर्थियों के लिए स्थानीय भाषा के रूप में भोजपुरी, मगही और हिंदी को शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्रीय भाषा की बाध्यता के कारण कई प्रतिभाशाली अभ्यर्थी अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाते, जिससे उनके रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं। यदि इन भाषाओं को शामिल किया जाता है तो छात्रों को अपनी सहज भाषा में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

विधायक ने राज्यपाल से दोनों ही मामलों में सकारात्मक पहल करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।

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