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सावन पुत्रदा एकादशी

23 अगस्त को मनाई जाएगी पुत्रदा एकादशी, श्रद्धा-भक्ति और सदाचार का संदेश देती है यह पावन तिथि

संतान सुख, परिवार की समृद्धि और भगवान विष्णु की आराधना का पावन पर्व है सावन पुत्रदा एकादशी

23 अगस्त को मनाई जाएगी पुत्रदा एकादशी, श्रद्धा-भक्ति और सदाचार का संदेश देती है यह पावन तिथि

रांची। सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी इस वर्ष 23 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व दिया गया है। इसी क्रम में सावन पुत्रदा एकादशी को संतान के सुख-स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य, परिवार की समृद्धि और सुख-शांति की कामना से जुड़ा पावन पर्व माना जाता है।

विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि ‘पुत्रदा’ का अर्थ संतान प्रदान करने वाली एकादशी से है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर संतान के कल्याण और परिवार के मंगल की प्रार्थना करते हैं। आधुनिक संदर्भ में इस पर्व का संदेश केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित नहीं, बल्कि संतान के अच्छे संस्कार, स्वस्थ जीवन और उज्ज्वल भविष्य की कामना से भी जुड़ा है।

राजा महाजित से जुड़ी है पौराणिक कथा

सावन पुत्रदा एकादशी की कथा महिष्मती नगरी के राजा महाजित से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक कथा के अनुसार राजा धर्मपरायण और प्रजावत्सल थे, लेकिन संतान न होने के कारण दुखी रहते थे। ऋषि-मुनियों की सलाह पर उन्होंने श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत कर भगवान विष्णु की आराधना की। कथा के अनुसार व्रत के पुण्य प्रभाव से उन्हें संतान सुख प्राप्त हुआ।

पूजा, व्रत और भक्ति का विशेष महत्व

एकादशी के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा में तुलसीदल, पीले पुष्प, फल, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रखते हैं।

दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भजन-कीर्तन और कथा-श्रवण किया जाता है। कई श्रद्धालु रात्रि जागरण और हरिनाम संकीर्तन भी करते हैं। द्वादशी के दिन उचित समय पर पारण के साथ दान-पुण्य और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा है।

संजय सर्राफ ने कहा कि सावन पुत्रदा एकादशी संयम, श्रद्धा, सेवा, करुणा और सदाचार का संदेश देती है। यह पर्व परिवार में सुख-शांति, संतान के कल्याण और समाज में सद्भाव की कामना के साथ आध्यात्मिक अनुशासन को मजबूत करने का अवसर भी है।

चंदन पाठक

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