मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग
मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग

निजी अस्पतालों की मनमानी पर विधानसभा में सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार दास ने उठाई आवाज, मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग
रांची। निजी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों से इलाज के नाम पर भारी अग्रिम राशि वसूलने तथा मरीज की मृत्यु के बाद बकाया भुगतान को लेकर शव रोके जाने के गंभीर मामले को सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार दास ने झारखंड विधानसभा में प्रमुखता से उठाया।
विधायक ने सदन में सरकार का ध्यान निजी अस्पतालों की मनमानी की ओर आकृष्ट कराते हुए मांग की कि मरीजों से इलाज शुरू करने से पहले मनमाने तरीके से एडवांस राशि लेने पर रोक लगाई जाए। साथ ही, मरीज की मृत्यु के बाद बकाया राशि के नाम पर शव परिजनों को सौंपने में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उज्जवल कुमार दास ने कहा कि इलाज हर व्यक्ति का अधिकार है और आर्थिक मजबूरी के कारण किसी परिवार को अपने मृत परिजन के शव के लिए अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने दोषी अस्पतालों की जवाबदेही तय करने तथा पीड़ित मरीजों और उनके परिजनों को न्याय दिलाने की मांग की।
विधायक की मांग पर सरकार की ओर से बताया गया कि 09 मई 2025 के विभागीय पत्र के माध्यम से सभी उपायुक्तों एवं सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु होने पर शुल्क जमा नहीं होने के कारण शव उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालने का निर्देश दिया गया है।
विधायक ने सरकार से इन निर्देशों का केवल कागजों तक सीमित न रहकर सभी निजी अस्पतालों में सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था संवेदनशील और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि मरीज और उनके परिजनों को इलाज के दौरान आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मरीजों के अधिकारों और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े इस मुद्दे को विधानसभा में उठाकर सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार दास ने निजी अस्पतालों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का ध्यान महत्वपूर्ण विषय की ओर खींचा है।




