E-Paperक्राइमझारखंड
Trending

NTPC

गेरुआ पुल पर मंडरा रहा खतरा, घनी आबादी के बीच दौड़ रहे कोल और फ्लाई ऐश लदे हाइवा

टंडवा का शहीद चौक बना कोल माफिया का अड्डा! भारी वाहनों के जमावड़े से हर पल मंडरा रहा बड़े हादसे का खतरा

नकाश कंपनी की मनमानी पर उठे सवाल, आखिर किसके संरक्षण में शहीद चौक बना कोल ट्रांसपोर्टिंग हब?

गेरुआ पुल पर मंडरा रहा खतरा, घनी आबादी के बीच दौड़ रहे कोल और फ्लाई ऐश लदे हाइवा

SDO के आदेश की खुलेआम अवहेलना, नो-एंट्री जोन में धड़ल्ले से चल रहे भारी वाहन

टंडवा (चतरा): औद्योगिक नगरी टंडवा का ऐतिहासिक शहीद चौक आज कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। चौक के समीप स्थित भारत पेट्रोलियम के साईं पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन सैकड़ों कोयला एवं फ्लाई ऐश लदे हाइवा वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह क्षेत्र अब आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों का अस्थायी ट्रांजिट कैंप बन गया है।

स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए सड़क पार करना भी जोखिम भरा हो गया है। दिनभर भारी वाहनों का जमावड़ा रहने से जाम की समस्या आम हो गई है और हर पल किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

SDO के आदेश को कौन कर रहा दरकिनार?

 

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस गंभीर समस्या को लेकर टंडवा के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत की गई थी। इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी, सिमरिया द्वारा पत्रांक संख्या-486 के तहत उड़सू मोड़ से शहीद चौक रोड तक नो-एंट्री जोन घोषित कर कानूनी कार्रवाई का निर्देश जारी किया गया था।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासनिक आदेश स्पष्ट है, तो फिर नो-एंट्री क्षेत्र में भारी वाहनों का आवागमन किसके इशारे पर जारी है? आखिर किसके संरक्षण में सरकारी आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है?

नकाश कंपनी पर उठे गंभीर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि चट्टीबरियातू कोल माइंस से कोयला ढुलाई करने वाले नकाश ट्रांसपोर्टिंग कंपनी के वाहन टंडवा शहीद चौक को अपना स्थायी पड़ाव बना चुके हैं। जबकि टंडवा से टोरी साइडिंग के बीच कई अन्य पेट्रोल पंप मौजूद हैं, इसके बावजूद घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित साईं पेट्रोल पंप पर ही वाहनों की भीड़ लगना कई सवाल खड़े करता है।

लोग पूछ रहे हैं—

आखिर नकाश कंपनी के संचालक विकास जैन और अरुण को किसने यह छूट दी?

घनी आबादी वाले क्षेत्र में भारी वाहनों के संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई?

क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?

गेरुआ पुल पर मंडरा रहा खतरा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कोल और फ्लाई ऐश लदे ओवरलोडेड वाहनों का लगातार दबाव गेरुआ पुल की संरचना को कमजोर कर रहा है। पुल के आसपास घंटों तक वाहनों की कतार लगी रहती है, जिससे उसकी भार वहन क्षमता पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो गेरुआ पुल भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

धूल, प्रदूषण और बीमारी का बढ़ता संकट

कोल वाहनों की लगातार आवाजाही से पूरे क्षेत्र में धूल का गुबार छाया रहता है। घरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थलों पर कोयले की धूल जम रही है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।

डीजल कमीशनखोरी की जांच की उठी मांग

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भारत पेट्रोलियम के साईं पेट्रोल पंप पर कोल ट्रांसपोर्टिंग वाहनों की असामान्य भीड़ को लेकर भी सवाल उठाए हैं। लोगों ने आरोप लगाया है कि डीजल बिक्री और कमीशनखोरी के संभावित खेल की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पहले मिली थी राहत, अब फिर वही हालात

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी सन्नी राज द्वारा की गई सख्त कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए स्थिति नियंत्रण में आ गई थी। लेकिन अब एक बार फिर शहीद चौक भारी वाहनों के कब्जे में नजर आ रहा है।

ग्रामीणों की चेतावनी

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

 

✔ नो-एंट्री आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए।

✔ कोल एवं फ्लाई ऐश वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही पर रोक लगे।

✔ साईं पेट्रोल पंप की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

✔ गेरुआ पुल का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।

✔ दोषी ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई हो।

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो टंडवा शहीद चौक पर होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और अधिकारियों की होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!