आदिवासियों का जोरदार प्रदर्शन
जल-जंगल-जमीन हमारा है’ के नारों से गूंजा चकला, चितरपुर कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित ग्राम सभा स्थगित

कंपनी वापस जाओ! चकला में भूमि अर्जन के खिलाफ आदिवासियों का जोरदार प्रदर्शन
‘जल-जंगल-जमीन हमारा है’ के नारों से गूंजा चकला, चितरपुर कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित ग्राम सभा स्थगित
लातेहार/चंदवा | The Dainik Aawaz 24 News
लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड स्थित चकला पंचायत में प्रस्तावित चितरपुर कोल ब्लॉक के लिए भूमि अर्जन को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में आदिवासी एवं स्थानीय ग्रामीण चकला पंचायत भवन के समीप पहुंचे और भूमि अर्जन की प्रक्रिया के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
विरोध प्रदर्शन में चितरपुर, चकला, बरवाटोली, भुकुटोला और पड़ुवा समेत आसपास के गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर ‘जल-जंगल-जमीन हमारा है’, ‘कंपनी वापस जाओ’, ‘ग्राम सभा का उल्लंघन बंद करो’, ‘किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे’ जैसे नारे लगाए। पूरे क्षेत्र में विरोध के नारों की गूंज सुनाई दी।
बताया गया कि ओडिशा एलायंस स्टील प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित चितरपुर कोल ब्लॉक रिवाइज्ड कोल माइंस के लिए भूमि अर्जन की प्रक्रिया के तहत 31 अगस्त को चकला गांव में ग्राम सभा आयोजित की जानी थी। इसकी सूचना मिलते ही स्थानीय विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीण बड़ी संख्या में पंचायत भवन पहुंच गए।
हालांकि, ग्रामीणों के पहुंचने से पहले ही चकला पंचायत की मुखिया पूनम रंजीता एक्का ने ग्राम सभा को स्थगित कर दिया था। ग्राम सभा स्थगित होने की जानकारी सभी ग्रामीणों तक समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
मौके पर ग्रामीणों ने मुखिया से सवाल किया कि ग्राम सभा में कंपनी के प्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अधिकारी क्यों नहीं पहुंचे। इस पर मुखिया पूनम रंजीता एक्का ने बताया कि उन्होंने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ग्राम सभा को स्थगित किया है और इसकी सूचना लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया था। सूचना नहीं मिल पाने पर उन्होंने ग्रामीणों से खेद भी जताया।
‘अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामीणों की सहमति जरूरी’
मुखिया पूनम रंजीता एक्का ने कहा कि चकला क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है और यहां आदिवासी ग्रामीणों की इच्छा तथा ग्राम सभा की प्रक्रिया को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कोयला खनन से संबंधित गतिविधियां ग्राम सभा की सहमति के बिना आगे बढ़ाई जा रही हैं।
वहीं ग्रामीणों ने साफ कहा कि जमीन उनके लिए सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि आजीविका, पहचान, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि उनकी सहमति के बिना भूमि अर्जन की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
कंपनी और अधिकारियों के नहीं पहुंचने से बढ़ी नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों और भू-अर्जन पदाधिकारी के कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
फिलहाल, हिंडालको की ओर से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ग्राम सभा हुई है या नहीं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज।




