
विद्यालय परिसर की खरीदी गई जमीन का दाखिल-खारिज रद्द, बच्चों के भविष्य पर मंडराया संकट; प्रबंधन ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार
हजारीबाग: शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके एडुका वैली पब्लिक स्कूल, अतीया रोमी,
कटकमसांडी रोड, हजारीबाग को प्रशासनिक प्रक्रिया में उलझने के कारण गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय परिसर के विस्तार और बच्चों के खेलने-कूदने के लिए खरीदी गई 5 डिसमिल भूमि का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) अंचल अधिकारी, कटकमसांडी द्वारा दोबारा अस्वीकृत कर दिए जाने से विद्यालय प्रबंधन, अभिभावकों और छात्रों में निराशा का माहौल है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, यह भूमि विशेष रूप से बच्चों के लिए खेल मैदान, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और विद्यालय के भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखकर खरीदी गई थी। लेकिन जियो-टैग मैपिंग कर्मचारियों द्वारा समय पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण पहले इस जमीन का सुओ-मोटो दाखिल-खारिज अस्वीकृत कर दिया गया। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने सभी आवश्यक दस्तावेजों और अनुशंसा पत्र के साथ दोबारा आवेदन प्रस्तुत किया और अंचल अधिकारी से दाखिल-खारिज स्वीकृत करने का अनुरोध किया।
विद्यालय का कहना है कि दूसरी बार भी आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया गया कि पूर्व में दाखिल-खारिज अस्वीकृत हो चुका है, इसलिए वर्तमान स्तर पर इसे स्वीकृत करना संभव नहीं है। साथ ही विद्यालय प्रबंधन को सलाह दी गई कि वे इस मामले में भूमि उप समाहर्ता (एलआरडीसी), हजारीबाग के समक्ष अपील करें।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है। यदि विद्यालय परिसर का विस्तार नहीं हो पाएगा तो छात्रों के लिए खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास प्रभावित होगा। प्रबंधन का आरोप है कि एक ओर विद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान को नियमों के नाम पर बार-बार निराश किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे मामलों में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिन पर सीएनटी एक्ट के प्रावधानों के तहत सवाल उठते रहे हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने इस स्थिति को प्रशासन का असहयोगात्मक रवैया बताते हुए कहा कि इससे न केवल विद्यालय, बल्कि सैकड़ों अभिभावकों और विद्यार्थियों की भावनाएँ भी आहत हुई हैं। उनका कहना है कि यदि एक शिक्षण संस्थान को बच्चों के हित में खरीदी गई जमीन का भी वैधानिक अधिकार प्राप्त करने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़े, तो यह चिंता का विषय है।
इसी मामले को लेकर विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शाहिद खान ने उपायुक्त, हजारीबाग तथा झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और विद्यालय को न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए तथा विद्यालय के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।




