चंदवा में मरीजों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल
बिना पंजीकरण-बिना डिग्री का खेल? चंदवा में मरीजों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल

चंदवा में स्वास्थ्य के नाम पर बड़ा खेल? कथित अवैध पैथोलॉजी सेंटर और डेंटल क्लिनिक बेखौफ, विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
चंदवा, लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रखंड मुख्यालय और आसपास के इलाकों में कथित तौर पर बिना वैध पंजीकरण, आवश्यक योग्यता और निर्धारित मानकों के पैथोलॉजी सेंटर एवं डेंटल क्लिनिक संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर छोटी-छोटी दुकानों और किराए के कमरों में जांच केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में खून, पेशाब और अन्य पैथोलॉजिकल जांच किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन संबंधित संस्थानों के पंजीकरण, तकनीकी स्टाफ की योग्यता, जांच की गुणवत्ता और बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जांच रिपोर्ट सही या मरीज की जिंदगी से खिलवाड़?
सबसे गंभीर सवाल जांच की विश्वसनीयता को लेकर है। स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सामने आ रही है कि कुछ कथित जांच केंद्रों में प्रशिक्षित कर्मियों और निर्धारित मानकों की अनदेखी कर जांच की जा रही है।
अगर किसी मरीज की जांच रिपोर्ट ही गलत या संदिग्ध हो, तो उसके आधार पर डॉक्टर द्वारा किया गया इलाज भी प्रभावित हो सकता है। गलत रिपोर्ट का मतलब सिर्फ कागज पर एक गलती नहीं, बल्कि मरीज के इलाज, दवा और स्वास्थ्य पर सीधा असर हो सकता है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या चंदवा में संचालित सभी पैथोलॉजी सेंटरों की नियमित जांच होती है? क्या इनके पास आवश्यक पंजीकरण और योग्य तकनीकी स्टाफ मौजूद है? और क्या स्वास्थ्य विभाग ने कभी इनके उपकरणों एवं जांच प्रक्रिया की गुणवत्ता की जांच की है?
डेंटल क्लिनिक के बोर्ड के पीछे कौन कर रहा इलाज?
इसी तरह चंदवा में कुछ स्थानों पर डेंटल क्लिनिक के
नाम से दंत चिकित्सा किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दांत निकालने, दर्द और मसूड़ों की समस्या के इलाज सहित विभिन्न प्रक्रियाओं के नाम पर मरीजों से शुल्क लिया जाता है। सवाल यह है कि इन स्थानों पर इलाज करने वाला व्यक्ति वास्तव में मान्यता प्राप्त दंत चिकित्सक है या नहीं?
गरीब और ग्रामीण मरीज अक्सर बोर्ड, मशीन और क्लिनिक देखकर उसे वैध चिकित्सा केंद्र मान लेते हैं। ऐसे में यदि बिना आवश्यक योग्यता वाला व्यक्ति इलाज करता है तो यह मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
बायो-मेडिकल वेस्ट का क्या होता है?
पैथोलॉजी और दंत चिकित्सा केंद्रों से निकलने वाला मेडिकल कचरा सामान्य कचरा नहीं होता। इस्तेमाल की गई सुई, रक्त से संक्रमित सामग्री, टेस्ट ट्यूब और अन्य जैव-चिकित्सकीय कचरे का निर्धारित तरीके से निस्तारण जरूरी है।
लेकिन चंदवा में संचालित बताए जा रहे इन केंद्रों में बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था वास्तव में है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
यदि मेडिकल कचरा खुले में फेंका जाता है या सामान्य कचरे के साथ मिलाया जाता है, तो इससे मरीजों के साथ-साथ आम लोगों और सफाईकर्मियों के लिए भी संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है।
कागजों पर नियम, जमीन पर निगरानी कितनी?
क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट से जुड़े नियमों के तहत स्वास्थ्य संस्थानों के पंजीकरण, आवश्यक मानकों, योग्य कर्मियों, रिकॉर्ड और मरीजों की सुरक्षा से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि चंदवा प्रखंड में
संचालित निजी पैथोलॉजी सेंटर और डेंटल क्लिनिकों का सत्यापन आखिर कब हुआ?
क्या स्वास्थ्य विभाग के पास इन संस्थानों की सूची है?
कितने संस्थान पंजीकृत हैं?
कितने संस्थानों का निरीक्षण हुआ है?
किसके पास योग्य तकनीकी स्टाफ है?
और यदि कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं कर रहा है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बोले—जानकारी नहीं
मामले को लेकर चंदवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से फोन पर पक्ष लिया गया। उन्होंने बताया कि उन्हें इस संबंध में विशेष जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई शिकायत लिखित या मौखिक रूप से प्राप्त होती है तो अपने स्तर से जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल स्वास्थ्य विभाग से है
मामला केवल किसी एक सेंटर का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी से जुड़ा है।
अगर शिकायतें गलत हैं तो स्वास्थ्य विभाग जांच कर स्थिति स्पष्ट करे।
और यदि शिकायतों में सच्चाई है तो नियमों के विपरीत संचालित संस्थानों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
चंदवा की जनता अब जवाब चाहती है—क्या स्वास्थ्य विभाग इन कथित अवैध पैथोलॉजी सेंटरों और डेंटल क्लिनिकों की जांच करेगा? क्या इनके दस्तावेज, चिकित्सकीय योग्यता, पंजीकरण, उपकरण और मेडिकल वेस्ट निस्तारण व्यवस्था की जांच होगी?
क्योंकि सवाल सिर्फ रिपोर्ट की एक पर्ची का नहीं है…
सवाल चंदवा के मरीजों की जिंदगी और उनके भरोसे का है।




