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श्रद्धा से किया गया मंत्र जाप अवश्य देता है फल — शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब”

शिव महापुराण कथा में गूंजा सनातन संस्कृति का संदेश, भक्ति और संस्कार से शिवमय हुआ सुकुरहुटू का वातावरण

रांची: फुटबॉल मैदान, सुकुरहुटू में श्री शिवाला सेवा समिति, रांची के तत्वावधान में आयोजित भव्य श्री शिव महापुराण कथा में आज श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कार, अध्यात्म एवं जीवन मूल्यों से जुड़े अनेक प्रेरणादायक संदेश प्राप्त हुए। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही और पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से शिवमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव एवं श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण किया।

कथा के दौरान व्यासपीठ से कहा गया कि मंत्र बीज के समान होते हैं। यदि मंत्र जाप में उच्चारण की थोड़ी त्रुटि भी हो जाए तो भय या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यदि श्रद्धा, विश्वास और सच्चे भाव से भगवान का स्मरण किया जाए तो मंत्र अवश्य फल प्रदान करता है। जैसे भूमि पर गिरा हुआ बीज समय आने पर स्वयं अंकुरित हो जाता है, उसी प्रकार श्रद्धा से किया गया मंत्र जाप भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

व्यासपीठ से भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया कि शिवलिंग पर अर्पित जल अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली माना गया है। उस जल से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त नकारात्मकता, नजर दोष तथा मानसिक अशांति दूर होती है। श्रद्धालुओं को नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना करने एवं घर में धार्मिक वातावरण बनाए रखने की प्रेरणा दी गई।

कथा के दौरान पूर्वजों के सम्मान पर विशेष जोर देते हुए कहा गया कि जिस परिवार में अपने पूर्वजों का आदर किया जाता है, वहां सदैव सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। श्रद्धालुओं को अपने घरों में पूर्वजों की तस्वीर लगाने तथा उनके बताए संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।

व्यासपीठ से माता-पिता की सेवा को मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताया गया। कहा गया कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त तीर्थों का वास होता है और जो संतान अपने माता-पिता का सम्मान एवं सेवा करती है, उसके जीवन में कभी अभाव नहीं आता। ऐसे परिवारों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है तथा उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

इस अवसर पर शिव महापुराण में वर्णित चंचुला की कथा का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। कथा में बताया गया कि किस प्रकार पापमय जीवन व्यतीत करने वाली चंचुला ने शिव महापुराण का श्रवण कर अपने जीवन को बदल दिया और शिवभक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि सच्चे पश्चाताप, सत्संग एवं भगवान शिव की भक्ति से सबसे बड़े पापी का भी उद्धार संभव है। भगवान शिव केवल भाव के भूखे हैं और जो सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसे वे अवश्य स्वीकार करते हैं।

 

कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ भगवान शिव का गुणगान किया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन एवं शिव नाम संकीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा के उपरांत प्रसाद ग्रहण कर आयोजन की सराहना की।

श्री शिवाला सेवा समिति, रांची की ओर से बताया गया कि कथा के आगामी दिनों में भी श्रद्धालुओं के लिए अनेक आध्यात्मिक प्रसंगों एवं धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाएगा। समिति ने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की है।

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