चकला कोयला खदान पर घमासान!
503.578 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन की तैयारी? ग्रामीणों की सहमति और PESA प्रक्रिया पर विवाद

503.578 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन की तैयारी? ग्रामीणों की सहमति और PESA प्रक्रिया पर विवाद
चकला कोयला खदान पर घमासान! ग्रामसभा से वन भूमि NOC तक उठे बड़े सवाल
चंदवा (लातेहार)। चंदवा प्रखंड के चकला क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़ी परियोजना में ग्रामसभा की वैधता, ग्रामीणों की सहमति, वन भूमि डायवर्जन, मुआवजा और पुनर्वास को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चकला पंचायत की मुखिया रंजीता एक्का ने दावा किया है कि कोयला खदान के लिए PESA कानून के प्रावधानों के अनुरूप ग्रामसभा हुई ही नहीं। हालांकि, इस दावे की प्रशासनिक अभिलेखों से स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
वहीं, कांग्रेस के चंदवा प्रखंड अध्यक्ष असगर खान ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीणों की सहमति लेने के बजाय विरोध करने वालों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री के लिए ग्रामीणों पर कथित दबाव बनाए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हाथी क्षेत्र और वन भूमि पर भी सवाल
चकला क्षेत्र को हाथियों के आवागमन वाला इलाका बताते हुए वन विभाग की NOC पर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि परियोजना के लिए करीब 503.578 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग से संबंधित Stage-I वन स्वीकृति प्रक्रिया सामने आई है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रामसभा की सहमति और वन भूमि से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह पालन हुआ है? ग्रामीणों की सहमति, वनाधिकार कानून, PESA और भूमि अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच अब पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन गई है।




