
हाई कोर्ट की डिग्री के बाद जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड, ‘गैरमंजरूआ आम’ बताए जाने पर रैयत राजेंद्र प्रसाद ने जताई आपत्ति
बालूमाथ में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर उठे सवाल, रैयत बोले—हाई कोर्ट की डिग्री के आधार पर ऑनलाइन हुई जमीन, लगान भी हो रहा जमा
बालूमाथ। प्रखंड क्षेत्र के आरा-चमातू गांव में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर नया विवाद सामने आया है।
रैयत राजेंद्र प्रसाद ने एक प्रकाशित खबर में अपनी जमीन को ‘गैरमंजरूआ आम’ बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनकी जमीन खाता संख्या 175 में दर्ज है और इस भूमि को लेकर उन्हें हाई कोर्ट से डिग्री प्राप्त है।

राजेंद्र प्रसाद के अनुसार, न्यायालय से प्राप्त डिग्री के आधार पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया है और वर्तमान में उक्त जमीन का लगान भी कट रहा है। ऐसे में प्रकाशित खबर में जमीन को गैरमंजरूआ आम बताया जाना उनके अनुसार तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
‘गैरमंजरूआ खास है जमीन’—रैयत का दावा
राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया कि संबंधित जमीन गैरमंजरूआ खास है और इस संबंध में उनके पक्ष में न्यायालय की डिग्री मौजूद है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया गया है, इसलिए जमीन की प्रकृति को लेकर किसी भी खबर या दावे से पहले राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालय की डिग्री का अवलोकन किया जाना चाहिए।
सीओ ने भी दस्तावेज देखकर ऑनलाइन रिकॉर्ड की पुष्टि की
मामले में बालूमाथ अंचलाधिकारी से बातचीत की गई। अंचलाधिकारी ने बताया कि राजेंद्र प्रसाद की ओर से हाई कोर्ट की डिग्री से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद उपलब्ध न्यायालयी डिग्री के आधार पर जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड किया गया।
अंचलाधिकारी के अनुसार, उपलब्ध डिग्री के आधार पर राजेंद्र प्रसाद की जमीन को ‘खास’ के रूप में ऑनलाइन दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रकाशित खबर में उक्त जमीन को ‘गैरमंजरूआ आम’ बताया जाना सही नहीं है।
न्यायालयी डिग्री और राजस्व रिकॉर्ड बना मुख्य आधार
इस पूरे मामले में अब हाई कोर्ट की डिग्री, खाता संख्या 175 से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड और ऑनलाइन दर्ज भूमि विवरण महत्वपूर्ण हो गए हैं। रैयत का दावा है कि न्यायालय की डिग्री के बाद जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार हुआ और लगान भी जमा हो रहा है, जबकि पूर्व में प्रकाशित खबर में जमीन की अलग प्रकृति बताई गई थी।
https://youtu.be/hZpzh67kMDI?si=cFXG5M2hAW4dtofT
फिलहाल उपलब्ध पक्षों के अनुसार, रैयत की आपत्ति और अंचलाधिकारी के स्पष्टीकरण के बाद जमीन को ‘गैरमंजरूआ आम’ बताए जाने वाले दावे पर सवाल खड़े हुए हैं। जमीन की वास्तविक स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायालयी आदेशों और आधिकारिक राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही किया जा सकता है।



