झारखंड खनिजों का भंडार
MMDR पर JMM का केंद्र पर पलटवार, विनोद पांडेय बोले—“खनिज चाहिए तो झारखंड के अधिकार और बकाये का जवाब भी देना होगा”

MMDR पर JMM का केंद्र पर पलटवार, विनोद पांडेय बोले—“खनिज चाहिए तो झारखंड के अधिकार और बकाये का जवाब भी देना होगा”
“झारखंड के खनिज पर पहला हक झारखंडियों का, केंद्र पहले 1.36 लाख करोड़ का हिसाब दे” — विनोद पांडेय
रांची। MMDR संशोधन कानून को लेकर झारखंड में सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा की ओर से राज्य सरकार पर लगाए गए आरोपों पर झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने पलटवार करते हुए केंद्र सरकार से झारखंड के खनिज हित और कथित 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये पर जवाब मांगा है। 
विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा का दशकों से दोहन हुआ, लेकिन खनन प्रभावित क्षेत्रों में आज भी प्रदूषण, विस्थापन और बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं। उनका सवाल है कि खनन प्रभावित लोगों के अधिकार और उचित क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उन्होंने भाजपा सांसदों से केंद्र सरकार के सामने झारखंड का पक्ष मजबूती से रखने और राज्य के कथित बकाये का मुद्दा उठाने की अपील की।
पांडेय ने MMDR संशोधन को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड सिर्फ खनिज का भंडार नहीं है—यहां की जमीन, जंगल, पानी और लोगों के अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि खनिज संपदा से होने वाले लाभ में झारखंड और झारखंडियों की हिस्सेदारी क्या होगी?
वहीं, केंद्र की ओर से MMDR संशोधन को निवेश, रोजगार और खनन क्षेत्र में एकरूपता से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जबकि झारखंड सरकार इस कानून के वित्तीय और राज्य-अधिकार संबंधी प्रभावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर चुकी है।
अब MMDR कानून, 1.36 लाख करोड़ के दावे और झारखंड के खनिज अधिकारों का यह विवाद सियासी बयानबाजी से निकलकर कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता दिख रहा है।



