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11सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया,जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा,धरना के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी कांके को मांग पत्र सौंपा गया।

11सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया,जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा,धरना के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी कांके को मांग पत्र सौंपा गया।

कांके। सोमवार को काँके प्रखंड परिसर में, जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड प्रदेश के तत्वाधान में,झारखंड विधानसभा से डीलिस्टिंग बिल पास कर केंद्र भेजने सहित 11सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व बोड़या मुखिया सोमा उरांव ने किया . प्रदर्शन के बाद जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार एवं राज्यपाल झारखंड के नाम धरना के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी कांके को मांग पत्र सौंपा गया।

 

मांग पत्र में मुख्य रूप से

 

1. झारखंड सरकार (मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन) में वर्तमान समय में जो जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो रहा है, उस जाति प्रमाण पत्र में केवल पिता का नाम होता है, अर्थात यह 2013 से चला आ रहा है। उस समय कैबिनेट से एक चिट्ठी निर्गत हुई थी जिसमें कोई जनजाति आदिवासी महिला यदि अन्य दूसरे पुरुष से शादी/विवाह करती है तो वह मायके से जाति प्रमाण पत्र बना सकता है। इसका दूर परिणाम 2013 से यह हो रहा है की जनजाति महिला दूसरे पुरुष से शादी कर रहे हैं और मायके से जाति प्रमाण पत्र बनाकर सबसे पहले धर्मांतरण, नौकरी, जमीन, सरकार की योजनाएं तथा एकल पद मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद तथा विधानसभा एवं लोकसभा के जनजातियों के रिजर्व सीट पर धर्मात्रित ईसाई और मुस्लिम काबिज हो रहे हैं। इसी के कारण बंगाला देशीय घुसबैठिया का भी बोलबाला हो गया है। इसी कारण जाति प्रमाण पत्र में पिता के नाम के साथ-साथ पति का नाम होना अनिवार्य हो ताकि जनजातियों का आरक्षण बच सके। नोट:- इस बावत झारखंड मंत्रालय से एक पत्र निर्गत की जाए।

 

2. झारखंड राज्य में सी.एन.टी. एवं एस.पी.टी. एक्ट होते हुए भी सदा पट्टा पर जमीनों की खरीद बिक्री हो रही है। सदा पट्टा पर लेन-देन होने के बाद नोटरी पब्लिक का मोहर लग रहा है, इस पर तुरंत रोक लगाई जाए।

 

 

3. पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र एवं आय प्रमाण पत्र एक सप्ताह के अंदर देने की व्यवस्था करें। ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।

 

 

4. ग्रामीणों को पंजी-कक में प्लॉट नम्बर, खाता नम्बर, रकबा तथा नाम में त्रुटि सुधार हेतू ग्रामीणों को सुविधा हो, अधिक भाग-दौड़ न हो और अधिकारी रूपयों की माँग न करें। इसे आम जन के लिए सरल बनाया जाए।

5. जनजातियों/आदिवासियों की सामाजिक व्यवस्थाओं की जमीन, सरना, मसना, हड़बोड़ी, अखरा, गाँवा देवती, जतरा पूजा स्थल, जमीन, भूईहरी, डाली कतारी, खूंटकटी, मुण्डा जमीन, महतो जमीन, पईनभोरा जमीन वगैरह जमीन की रक्षा एवं सवर्द्धन हेतू कड़ा कानून बनायें। आज प्राय: ऐसे जमीनों पर अपने ही समाज के लोग कब्जा किये हुए हैं या दूसरे व्यक्तियों के द्वारा कब्जा कर रहें है। बहुत ऐसे पूजा स्थल/जमीन अभी वर्तमान में है और वहाँ पूजा-पाठ परम्परागत से हो रहा है परन्तु खतियान एवं पंजी-कक में किसी दूसरे व्यक्ति/समुदाय के नाम से दर्ज है तथा रसीद भी कट रहा है जो कि आनेवाले दिनों में जनजातियों के लिए बहुत बड़ा समस्या खड़ा कर सकता है। यदि ऐसा जमीन ही नही रहेगा तो आदिवासी कहां जाएगा इसलिए ऐसे जमीनों को चिन्हित कर संरक्षण किया जाए।

 

6. पंचायत जनप्रतिनिधियों की आकस्मिक मृत्यु/दुर्घटना की स्थिति में 50,00,000/- (पचास लाख) रूपये का बीमा/मुआवजा दिया जाए एवं विधायकों की तरह सेवा समाप्ति के बाद पेंशन दी जाए और आत्मरक्षा हेतू अंगरक्षक एवं शस्त्र की लाईसेंस दी जाए।

 

7. भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, और यह देश के संसाधनों और विकास पर भारी दबाव डाल रही है। जनसंख्या वृद्धि के कारण, देश में गरीबी, बेरोजगारी, और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। भारत में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करना आवश्यक है। यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति, अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के हों। इस कानून के तहत, प्रत्येक परिवार को दो बच्चों तक सीमित किया जाना चाहिए।

 

 

8. हिन्दुओं के मंदिर में दान पुण्य का पैसा का नियंत्रण सरकार के पास है, ठीक उसी प्रकार चर्च एवं मस्जिद में दान-पुण्य का पैसा का नियंत्रण भी सरकार के पास हो, नहीं तो मंदिर से भी नियंत्रण हटाया जाए।

 

 

9. ग्रामीण क्षेत्रों में जब से स्मार्ट मीटर लगा है, उसके बाद से ग्रामीणों का पाँच गुणा दस गुणा बिजली बिल आ रहा है जिससे ग्रामीण अत्यधिक परेशान है तथा शिकायत करने पर भी सुनवाई नही होती है। जनहित को देखते हुए इसे अति सरल बनाया जाए।

 

 

10. सरकार द्वारा प्रस्तावित नगड़ी में रिम्स-2 निर्माण हेतू भूमि को दुसरे जगह पर रिम्स-2 निर्माण किया जाए एवं नगड़ी के कृषि युक्त भूमि को आदिवासियों/मुलवासियों को वापस किया जाए जिससे ग्रामीण खेतीबारी कर जीवन यापन कर सके।

 

 

11. नोट:- झारखंड सरकार विधानसभा से डीलिस्टिंग का बिल पास कर महामहिम राज्यपाल महोदय से हस्ताक्षर कराकर केंद्र भेजें। केंद्र सरकार डीलिस्टिंग बिल अति शीघ्र पास करें। डीलिस्टिंग यानि जो जनजाति अपनी रुढ़ि प्रथा, संस्कृति, परंपरा छोड़कर ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिए है, वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो। धरना सह ज्ञापन कार्यक्रम में समाज के अगुवागण एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित हुए। जिसमें महाराजा मदरा मुंडा सेवा संस्थान न्याय ट्रस्ट के संरक्षक पहलवान मुंडा, जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव, जिला परिषद सदस्य किरण देवी एवं सुषमा देवी, जय मंगल उरांव, असवानी टोप्पो उराव,परना उराँव, विश्वकर्मा पहान, कैलाश मुंडा, झालो देवी, मालती देवी, ग्राम प्रधान सतीश तिग्गा, विक्रम उरांव समाजसेवी वीरेंद्र नारायण तिवारी व अन्य सभी ने कार्यक्रम में अपनी अपनी बातें रखी। कार्यक्रम का अध्यक्षता कर रहे जनजाति सुरक्षा मंच की मीडिया प्रभारी एवं बोड़ेया पंचायत के मुखिया सोमा उरांव ने अपने कड़ा शब्दों में कहा कि जनजाति से जो धर्म परिवर्तन करके क्रिश्चियन या मुसलमान बन गए हैं वैसे लोगों को जनजाति का आरक्षण का लाभ मिलना हर हाल में अब बंद होगा ,अभी भी समय है जनजाति से धर्म परिवर्तन करके अन्य जाति में जो चले गए हैं वे स्वयं अपने मूल धर्म पूर्वजों की पूजा पाठ रीति रिवाज रूढ़ि प्रथा में वापस चले आए अन्यथा उनका लगभग तय है। क्योंकि जनजाति सुरक्षा मंच आगामी 24 मई 2026 को देश के कोने-कोने से जनजातीय सांस्कृतिक समागम, गर्जना रैली, डीलिस्टिंग रैली लाल किला मैदान में दिल्ली जाएंगे और डीलिस्टिंग करा कर ही वापस लौटेंगे।

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