
ड्रोन से निगरानी, श्वान दस्ते के साथ छापेमारी… क्या अब टूटेगा बेरमो के कोयला सिंडिकेट का नेटवर्क?
बेरमो में कोयला माफिया पर CISF का शिकंजा! ‘जीरो कोल लीकेज’ रणनीति से तस्करों में हड़कंप, 14 संवेदनशील इलाकों पर नजर
बोकारो थर्मल: झारखंड के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में शामिल बेरमो अनुमंडल में अवैध कोयला खनन और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई ने अब नया रूप ले लिया है। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सख्ती के बीच कोयला तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमलो, करगली और चरकपनिया समेत B&K क्षेत्र में हालिया कार्रवाई के बाद अवैध कोयला कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि अभियान के दौरान ड्रोन कैमरों और श्वान दस्ते की मदद से संदिग्ध ठिकानों और कोयला तस्करी के संभावित रास्तों की निगरानी की गई। कार्रवाई में अवैध रूप से जमा कोयला और परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों की जब्ती की जानकारी सामने आई है।
14 संवेदनशील इलाकों पर फोकस से बढ़ सकती है चुनौती
बेरमो क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिन संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी की जरूरत बताई जा रही है, उनमें अलग-अलग तरह के संभावित तस्करी नेटवर्क शामिल हैं।
छिपे और दुर्गम ठिकाने: बुडगड्डा, गोबिंदपुर अरमो और गड़के जैसे इलाके।
खदानों के आसपास संभावित कोयला रिसाव: अरमो, गड़के, कंजकीरो और कथारा।
बस्तियों के रास्ते छोटी खेपों की तस्करी: बोरया बस्ती, खेतको और असनापानी। इन क्षेत्रों में साइकिल, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर जैसे माध्यमों से कोयले की अवैध ढुलाई किए जाने के आरोप सामने आते रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों की आड़ में संभावित हेराफेरी: बोकारो थर्मल, गोबिंदपुर और पिलपिलो।
इसके अलावा रामा हरिया के कुछ हिस्सों को संभावित बड़े ट्रांजिट रूट के तौर पर चिन्हित किए जाने की बात कही जा रही है, जहां से अवैध कोयले की खेप को दूसरे इलाकों तक पहुंचाने की आशंका रहती है।
क्या अब बदलेगा छापेमारी का तरीका?
कोयला चोरी और अवैध खनन के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती कार्रवाई से पहले सूचना लीक होने की रही है। ऐसे में यदि सुरक्षा एजेंसियां खुफिया सूचना के आधार पर अचानक कार्रवाई, तकनीकी निगरानी और CCL के साथ बेहतर समन्वय को लगातार मजबूत करती हैं, तो अवैध नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, CISF को MMDR Act के तहत मिले अधिकारों और स्थानीय पुलिस के बिना कार्रवाई के कानूनी दायरे को लेकर आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इस पहलू पर संबंधित एजेंसियों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
सिर्फ बेरमो नहीं, पूरे कोयला बेल्ट पर नजर की जरूरत
यदि बेरमो में शुरू हुई सख्ती लंबे समय तक जारी रहती है और इसी तरह की निगरानी CCL, BCCL और ECL के अन्य संवेदनशील कोयला क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो अवैध कोयला कारोबार पर अंकुश लगाने के साथ सरकारी राजस्व की संभावित क्षति को भी कम किया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या CISF की यह सख्ती लगातार जारी रहेगी और क्या बेरमो में वर्षों से जमे अवैध कोयला कारोबार के नेटवर्क पर वास्तव में निर्णायक चोट हो पाएगी?



