"पुल नहीं तो मतदान नहीं"
लातेहार डीसी से ग्रामीणों की गुहार: अब संज्ञान लेकर तय हो जवाबदेही, आखिर एक साल से क्यों नहीं हुआ पुल का निर्माण?
एक साल से टूटा आरा का पुल, प्रशासन बेखबर! ग्रामीणों का ऐलान—पुल नहीं बना तो मतदान नहीं
लातेहार डीसी से ग्रामीणों की गुहार: अब संज्ञान लेकर तय हो जवाबदेही, आखिर एक साल से क्यों नहीं हुआ पुल का निर्माण?
चंदवा, लातेहार।

चंदवा प्रखंड अंतर्गत लाधुप पंचायत के आरा गांव में पिछले करीब एक वर्ष से क्षतिग्रस्त पड़ा पुल ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। बरसात के मौसम में क्षतिग्रस्त हुए इस पुल के कारण ग्रामीणों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार समस्या सामने आने के बावजूद अब तक इसके स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष बारिश के दौरान पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन की टीम ने मौके का निरीक्षण भी किया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही पुल की मरम्मत या नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्कूल से अस्पताल तक मुश्किल

पुल की बदहाली का सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है, वहीं किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। बरसात के दिनों में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक पुल का मामला नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित आवागमन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा सवाल है।
एक साल इंतजार के बाद ग्रामीणों का बड़ा ऐलान
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर जल्द पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो आगामी चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया जाएगा।
ग्रामीणों का यह ऐलान लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी नाराजगी और लंबे समय से चली आ रही समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि मतदान बहिष्कार लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग से जुड़ा संवेदनशील निर्णय है, लेकिन प्रशासन के लिए यह निश्चित रूप से एक गंभीर चेतावनी और तत्काल हस्तक्षेप का संकेत है।
लातेहार डीसी से विशेष संज्ञान की मांग
अब सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन से है—जब पुल की समस्या एक साल से मौजूद है और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंच चुकी थी, तो अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
लातेहार के जिला उपायुक्त (डीसी) से मांग है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की जाए। पुल की वर्तमान स्थिति का स्थल निरीक्षण कराकर निर्माण/पुनर्निर्माण की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए और ग्रामीणों को इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
एक छोटे से पुल के लिए ग्रामीणों को एक साल तक इंतजार करना पड़े और फिर उन्हें मतदान बहिष्कार जैसा कदम उठाने की बात कहनी पड़े—यह निश्चित रूप से गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय है।
अब सवाल सिर्फ पुल का नहीं, जवाबदेही का है
विकास की योजनाएं तभी सार्थक मानी जाएंगी, जब उनका लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। आरा के ग्रामीणों की परेशानी को अब केवल स्थानीय समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
लातेहार जिला प्रशासन की नजर अब इस मामले पर कब पड़ेगी?
क्या ग्रामीणों को एक और बरसात इसी बदहाल पुल के भरोसे गुजारनी पड़ेगी?
या फिर डीसी के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन की आंखें खुलेंगी और आरा गांव को जल्द एक सुरक्षित पुल मिलेगा?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब पुल निर्माण की मांग की है। अब देखना होगा कि उनकी आवाज प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों तक कब पहुंचती है और जमीनी स्तर पर कार्रवाई कब शुरू होती है।



