Calcutta Public School
नरसिंह-प्रह्लाद से लेकर झांसी की रानी और महाभारत तक—विद्यार्थियों ने नृत्य के जरिए जीवंत कीं भारतीय इतिहास और संस्कृति की गाथाएं

कलकत्ता पब्लिक स्कूल, ओरमांझी में संस्कृति के रंग में रंगा मंच, इंटर हाउस डांस प्रतियोगिता ने मोहा मन
नरसिंह-प्रह्लाद से लेकर झांसी की रानी और महाभारत तक—विद्यार्थियों ने नृत्य के जरिए जीवंत कीं भारतीय इतिहास और संस्कृति की गाथाएं
ओरमांझी। नृत्य और संगीत झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। इसी विरासत और भारतीय संस्कृति को मंच पर जीवंत करते हुए कलकत्ता पब्लिक स्कूल, ओरमांझी के सभागार में इंटर हाउस डांस प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। “अविस्मरणीय कथाएं—दंतकथाओं, मिथक से आधुनिकता तक” थीम पर आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में विभिन्न हाउस के विद्यार्थियों ने भारतीय इतिहास, पौराणिक कथाओं, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े कई प्रभावशाली विषयों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। नरसिंह-प्रह्लाद, झांसी की रानी, सीता से सती तक, द्रोणाचार्य-एकलव्य, पौराणिकता से अंतरिक्ष, महाभारत में अर्जुन-कौरव संवाद और कांतारा जैसे विषयों ने मंच पर इतिहास और मिथकों को जीवंत कर दिया।
शानदार वेशभूषा, भावपूर्ण अभिनय, आकर्षक नृत्य-भंगिमाओं और बेहतरीन तालमेल ने प्रस्तुतियों को यादगार बना दिया। विद्यार्थियों की मेहनत, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच हर प्रस्तुति में साफ नजर आई। पूरे कार्यक्रम के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
कार्यक्रम के दौरान झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करते हुए पद्मश्री रामदयाल मुंडा की प्रसिद्ध पंक्ति— “जहाँ चलना ही नृत्य और बोलना ही संगीत है, और शरीर ही मांदर है”—की भावना भी देखने को मिली।
विद्यालय की प्रधानाचार्या ने प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को अपनी कला और प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी हाउस के विद्यार्थियों और शिक्षिकाओं के प्रयासों की सराहना की।
इंटर हाउस डांस प्रतियोगिता ने न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच दिया, बल्कि उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, टीम भावना, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत किया। आयोजन के दौरान पूरा विद्यालय परिसर उत्सव और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया।
कलकत्ता पब्लिक स्कूल, ओरमांझी का यह आयोजन इस संदेश के साथ यादगार बना कि जब नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को कला के माध्यम से प्रस्तुत करती है, तो विरासत केवल संरक्षित नहीं होती—वह नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ती है।




