हैवानियत
सुरक्षा सिर्फ वादा है या जिम्मेदारी भी?

रांची में दरिंदगी से दहला शहर: तीन साल की मासूम के साथ हैवानियत, सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह फेल
दैनिक आवाज न्यूज, रांची: राजधानी रांची एक बार फिर शर्मसार हुई है। कोतवाली थाना क्षेत्र में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी ने न सिर्फ इंसानियत को झकझोर दिया है, बल्कि झारखंड में महिला और बाल सुरक्षा के खोखले दावों की पोल भी खोल दी है। पुलिस ने आरोपी वैन ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी से न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी?
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने मासूम को बहला-फुसलाकर अपने पास बुलाया और इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। यह घटना बताती है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं और कानून का डर लगभग खत्म हो गया है।
सरकार के दावे बनाम जमीनी हकीकत
झारखंड सरकार लगातार महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। राजधानी जैसे संवेदनशील इलाके में भी अगर तीन साल की बच्ची सुरक्षित नहीं है, तो बाकी प्रदेश की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सिस्टम पर बड़ा सवाल
- क्या पुलिस की गश्ती व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- क्या प्रशासन अपराध रोकने के बजाय सिर्फ घटनाओं के बाद कार्रवाई तक सिमट गया है?
- आखिर कब तक मासूम बेटियां इस तरह दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी?
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। सामाजिक संगठनों ने दोषी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर फांसी की सजा देने की मांग की है। साथ ही सरकार से स्पष्ट सवाल पूछा जा रहा है—“बेटियों की सुरक्षा का जिम्मा आखिर किसके कंधों पर है?”
अब सिर्फ बयान नहीं, एक्शन चाहिए
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता सबूत है। अगर अब भी सरकार नहीं जागी, तो यह मान लेना चाहिए कि “बेटी बचाओ” जैसे नारे सिर्फ पोस्टरों और भाषणों तक ही सीमित हैं।
समय आ गया है कि सरकार जवाब दे—सुरक्षा सिर्फ वादा है या जिम्मेदारी भी?




