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बिहार बोधगया से लौटा प्रशिक्षु शिक्षकों का दल

ऐतिहासिक–आध्यात्मिक धरोहरों के अध्ययन से समृद्ध हुआ शैक्षणिक परिभ्रमण

  • बिहार बोधगया से लौटा प्रशिक्षु शिक्षकों का दल
  • ऐतिहासिक–आध्यात्मिक धरोहरों के अध्ययन से समृद्ध हुआ शैक्षणिक परिभ्रमण

  • रांची, कांके, 22 फरवरी 2026, राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, कांके के सत्र 2024–26 के प्रशिक्षु शिक्षकों का दल तीन दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण संपन्न कर बिहार के विश्वविख्यात ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक नगर बोधगया से सकुशल लौट आया। 19 से 21 फरवरी तक आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य प्रशिक्षु शिक्षकों को ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।
  • परिभ्रमण के दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों ने विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर, पवित्र बोधि वृक्ष, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बौद्ध मठों तथा अन्य ऐतिहासिक स्थलों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने महाबोधि मंदिर की अद्वितीय स्थापत्य कला, इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थल के रूप में इसकी वैश्विक महत्ता तथा यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर के रूप में इसके संरक्षण एवं प्रबंधन की प्रक्रिया को विस्तार से समझा।
  • इस अध्ययन यात्रा के अंतर्गत प्रशिक्षु शिक्षकों ने समूह चर्चा, स्थल निरीक्षण, फील्ड नोट्स संकलन तथा प्रलेखन कार्य किया। उन्होंने बौद्ध दर्शन, विश्व शांति के संदेश, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं पर्यटन प्रबंधन जैसे विषयों पर भी अध्ययनात्मक विमर्श किया। प्रशिक्षुओं ने स्थानीय गाइडों एवं प्रबंधकों से संवाद कर ऐतिहासिक तथ्यों एवं समकालीन संदर्भों की जानकारी प्राप्त की।
  • प्रभारी प्राचार्य डॉ. रमण कुमार झा ने कहा कि “शैक्षणिक परिभ्रमण शिक्षक प्रशिक्षण का अभिन्न अंग है। इससे प्रशिक्षु शिक्षकों में शोधपरक दृष्टिकोण, अवलोकन क्षमता तथा व्यावहारिक समझ का विकास होता है। ऐसे अनुभव कक्षा शिक्षण को अधिक जीवंत, संदर्भपरक और प्रभावी बनाते हैं।”
  • शैक्षणिक परिभ्रमण के प्रभारी शिक्षक प्रो. भगीरथ आर्य (इतिहास विभाग) एवं डॉ. ओम प्रकाश (अंग्रेजी विभाग) ने बताया कि प्रशिक्षु शिक्षकों ने बोधगया की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का सूक्ष्म अध्ययन किया तथा रिपोर्ट निर्माण हेतु महत्वपूर्ण बिंदुओं को विधिवत रूप से नोट किया। उन्होंने कहा कि यह भ्रमण प्रशिक्षुओं में सांस्कृतिक संवेदनशीलता, राष्ट्रीय एकता और वैश्विक दृष्टिकोण के विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
  • प्रशिक्षु शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस यात्रा ने उन्हें इतिहास को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर प्रत्यक्ष अनुभूति के रूप में समझने का अवसर दिया। उन्होंने इसे ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं स्मरणीय अनुभव बताया।
  • महाविद्यालय परिवार ने इस सफल शैक्षणिक परिभ्रमण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आशा जताई कि भविष्य में भी ऐसे अध्ययनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे प्रशिक्षु शिक्षकों का सर्वांगीण शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास सुनिश्चित हो सके।

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