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प्रधानमंत्री मोदी की “आदिवासी-विरोधी सोच” इस घटना से उजागर हुई

झालमुड़ी ब्रेक पर सियासत गरम: टीएमसी ने पीएम मोदी पर लगाया आदिवासी नेताओं के अपमान का आरोप

रांची/झारग्राम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक चुनावी दौरे के दौरान सड़क किनारे झालमुड़ी खाते हुए वीडियो ने अब राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की “आदिवासी-विरोधी सोच” इस घटना से उजागर हुई है। पार्टी के अनुसार, झारग्राम में अपने कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने झालमुड़ी खाने के लिए अपना ठहराव बढ़ा दिया, जिसके चलते झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी व विधायक कल्पना सोरेन को वहां हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति नहीं दी गई।

टीएमसी का आरोप है कि दोनों नेताओं को घंटों इंतजार कराया गया और अंततः उन्हें अपना निर्धारित कार्यक्रम पूरा किए बिना ही रांची लौटना पड़ा। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधियों का “अपमान” बताया है।

टीएमसी ने अपने बयान में कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री आदिवासी बहुल क्षेत्र में वोट मांगने पहुंचे, वहीं दूसरी ओर उन्हीं समुदाय से आने वाले नेताओं के साथ ऐसा व्यवहार किया गया। पार्टी ने इस मुद्दे को चुनावी सम्मान और संवैधानिक मर्यादा से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

वहीं, इस पूरे मामले पर अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब ममता बनर्जी की पार्टी इसे आदिवासी अस्मिता और सम्मान से जोड़कर जनता के बीच ले जा रही है।

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