झारखंड आंदोलन
अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की जीवनी स्कूली पाठ्य पुस्तको में शामिल हों: अजय नाथ शाहदेव

अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का शहादत दिवस सादगी के साथ मनाया गया
168वे शहादत दिवस के उपलक्ष्य में अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की जीवनी स्कूली पाठ्य पुस्तको में शामिल हों: अजय नाथ शाहदेव
दैनिक आवाज न्यूज, रांची: प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सिपाही विद्रोह के जननायक अमर सेनानी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का शहादत दिवस अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव अध्ययन केंद्र के तत्वाधान में हटिया स्थित शहादत स्मारक स्तंभ के प्रांगण में पूर्वाह्न 11:00 बजे बहुत सादगी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समारोह पर उनके प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी ठाकुर बड़कागढ़ ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव के द्वारा कार्यक्रम का नेतृत्व किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में जेएससीए के अध्यक्ष श्री अजय नाथ शाहदेव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों, समाजसेवियों एवं नागरिकों ने अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।
श्री अजय नाथ शाहदेव ने अपने संबोधन में कहा की
अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के जीवनी को पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन 16 अप्रैल 1858 को रांची जिला स्कूल के समक्ष कदम के वृक्ष की डाली पर प्रातः 5:30 बजे अंग्रेजों द्वारा उनको फांसी पर लटका दिया गया था । इनकी पूरी बड़कागढ़ ईस्टेट को अंग्रेजों ने अपने अधीन कर ली । ठाकुर का गढ़ हटिया स्थित चिरनागढ़ को तोप से मारकर ध्वस्त कर दिया गया । इनकी धर्मपत्नी और एकमात्र पुत्र को मारने का ब्रिटिश सरकार ने षड्यंत्र रचा । जिसके परिणाम स्वरूप ठकुरानी को गढ़ छोड़कर भागना पड़ा और 12 साल निर्वासित जीवन गुमला स्थित खोरहा जंगल में बिताया। तब भी अंग्रेजी सरकार अपने गुप्तचरों के माध्यम से पता करते रहे , परंतु उन्हें खोज नहीं सके। मिताक्षरा कानून के तहत जब उनके पुत्र ठाकुर कपिल नाथ शाहदेव का उम्र 13 वर्ष हो गया, तब रानी प्रकट हो गई और कोलकाता विलियम फोर्ट में केस दर्ज किया। परंतु रानी को निराशा ही हाथ लगी । उन्हें बड़कागढ़ स्टेट वापस करने से इंकार कर दिया गया । अदालत ने फैसला दिया रानी और उसके पुत्र के जीविका के लिए राज्य से आने वाले लगान में से प्रतिमाह ₹30 दिया जाएगा और एक खपरैल का मकान रानी के लिए बनवा दिया जाएगा । जो 1880 में जगन्नाथपुर में बनवा दिया गया। रानी यहीं पर निवास करने लगी ।
आज इनके सातवे पीढ़ी के प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी ठाकुर बड़कागढ़ ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव अपने परिवार जनों के साथ निवास कर रहे हैं । इसके बावजूद लड़ाई जारी रही जो आज भी लड़ाई जारी है। अंग्रेजों की सजा आज भी उनके परिवार झेल रहे हैं । विभिन्न सरकारों के पास अपनी मांग रखी जाती रही परंतु सरकार उदासीन बनी रही । न्याय नहीं मिल सका बड़कागढ़ स्टेट की राजधानी हटिया में शहादत स्मारक स्तंभ के प्रांगण में सरकार से न्याय की गुहार किया जाता रहा है कि शहीद विश्वनाथ शाहदेव के परिवार को नौकरी, रोजगार, चिकित्सा दिया जाए पर आश्वासन के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ। सरकार ने घोषणा की थी कि अमर शहीद का ग्राम जगन्नाथपुर को आदर्श ग्राम बनाया जाएगा । इन्हें नौकरी रोजगार दी जाएगी परंतु आश्वासन बनकर रह गया ।
वही श्री ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव ने कहा एच ई सी कारखाना को सरकार ने अमर शहीद की पंद्रह सौ (1500)एकड़ जमीन मुफ्त में दे दी परंतु एचईसी प्रबंधन के आश्वासन के बाद भी एचईसी में अमर शहीद के वंशजों को नौकरी नहीं दिया और ना ही उनके उत्तराधिकारी को मुआवजा ही दिया ।
एच ई सी अमर शहीद की जमीनो को स्मार्ट सिटी के नाम पर सरकार को बेच रही है और अपना कारखाना चला रही है ।जिसका घोर निंदा अध्ययन केंद्र करती है ।
श्री गुप्तेश्वर सिंह ने कहा कि अंग्रेजो द्वारा दिया गया सजा आज भी अमर शहीद का परिवार भोग रही है सरकार स्वतंत्रता सेनानी का कल्याण करने में तत्पर है और 2004 ई में झारखंड सेनानी कोष का गठन किया की स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को सहायता होगी लेकिन कुछ लोगो ने अपना निजी स्वार्थ बना रखा है, अध्ययन केंद्र मांग करती हैं की कोष को समाप्त कर इसका पुनर्गठन किया जाए।
श्री अमरदीप कौशल ने कहा कि झारखंड की धरती अमर शहीदो की धरती है और यहां की सरकार युवा मुख्यमंत्री के हाथ में है। मैं सरकार से अमर शहीद के परिवार के कल्याण के दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग करता हूं ।
आज वोट के लिए शहीदों को बांटा जा रहा है। यह हमारा राष्ट्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं ।
शहीद जात पात और वोट की राजनीति से ऊपर है। इन्हें बांट कर देखना सरकार बंद करें अन्यथा ऐसा भी समय आएगा जब अन्याय ,शोषण ,जुल्म के खिलाफ हथियारबंद आंदोलन से इनकार नहीं किया जा सकता है।
इस अवसर पर श्री सत्यप्रकाश सुमन ने कहा कि हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय योगदान देना चाहिए। उनके बलिदान को स्मरण करते हुए युवाओं को देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया गया।
समारोह का संचालन गुप्तेश्वर सिंह ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन परवेज खलीफा ने किया ।
समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि श्री अजय नाथ शाहदेव, अमर शहीद के प्रत्यक्ष उतराधिकार श्री ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव, श्री कृष्णा नाथ शाहदेव, श्री अमरदीप कौशल, श्री अभिषेक सिंह,श्री गुप्तेश्वर सिंह, सीताराम ओहदार, परवेज खलीफा ,सूरज मुंडा , चंदन कविराज, अनुज सिंह, ओमप्रकाश मंडल, कार्तिक कुमार, सोनू सिंह, राकेश उरॉव, जैम्स मिंज , सोनी देवी, रेखा लकड़ा, बुधनी उरांव, शबीर, रोहित मुंडा, सोना कच्छप, रूपाली लकड़ा, हटिया, बडकागढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने उपस्थित होकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।



