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आईसीएसीए–2026 का सफल समापन, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किए नवीन शोध व तकनीकी अनुभव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए डेटा की गुणवत्ता ही सबसे महत्वपूर्ण : डॉ. नवनीत

*आईसीएसीए–2026 का सफल समापन, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किए नवीन शोध व तकनीकी अनुभव

रांची, 7 मार्च।


आर टी सी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची, झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी रांची एवं आई इ टी ई रांची चैप्टर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन फोर्थ इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस्ड कम्प्यूटिंग एंड एप्लीकेशंस आई सी ए सी ए 2026 का दूसरा दिन शनिवार को झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT), नामकुम परिसर, रांची में विभिन्न तकनीकी सत्रों, की-नोट व्याख्यानों तथा वैलेडिक्टरी सत्र के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों तथा उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाग लिया।
समापन सत्र के मुख्य वक्ता अमेरिका में कार्यरत नवनीत कुमार, ग्लोबल हेड – सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग, First Solar (USA) ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रभावशीलता पूरी तरह से डेटा की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यदि डेटा शुद्ध, सटीक और सुव्यवस्थित होगा, तभी एआई के परिणाम विश्वसनीय और उपयोगी होंगे। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग, सोलर ऊर्जा तकनीक तथा उच्च स्तरीय औद्योगिक अनुसंधान के वर्तमान परिदृश्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर तकनीक, स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियां और एआई आधारित औद्योगिक समाधान वैश्विक तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डॉ. नवनीत ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की “ऋषि इंटेलिजेंस” से भी जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि तकनीक मानवता के कल्याण और समाज के विकास में सार्थक भूमिका निभा सके। उन्होंने छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान करने तथा नवाचार की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।


सम्मेलन के दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा कई महत्वपूर्ण की-नोट व्याख्यान भी प्रस्तुत किए गए। इनमें डॉ. पवन वॉव्वेटी (T-Mobile, USA), डॉ. वी. श्रीधर (USA), के. जय बालन (USA), डॉ. एस. बुचुरेड्डी कर्री (USA) तथा हेमंत सोनी (USA) ने उन्नत कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, संचार प्रौद्योगिकी और स्मार्ट सिस्टम के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक अनुसंधान और तकनीकी प्रगति पर विस्तार से चर्चा की।
सम्मेलन के दौरान समानांतर रूप से कई टेक्निकल सेशन आयोजित किए गए, जिनमें देश-विदेश के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा उन्नत कंप्यूटिंग अनुप्रयोगों से संबंधित विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नेपाल, मलेशिया, अमेरिका और भूटान सहित भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। वहीं पश्चिम बंगाल, बिहार तथा झारखंड के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के शिक्षक, शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। विशेष रूप से रांची विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, बीआईटी मेसरा, आईआईआईटी रांची, ऊषा मार्टिन यूनिवर्सिटी, साईं नाथ यूनिवर्सिटी, अर्का जैन यूनिवर्सिटी, गवर्नमेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, रांची तथा झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रतिभागियों ने सम्मेलन में भाग लेते हुए अपने शोध कार्यों की प्रस्तुति दी। इसके अतिरिक्त झारखंड के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों से आए शिक्षक, छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों ने भी पेपर प्रेजेंटेशन के माध्यम से उन्नत कम्प्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल तकनीक से संबंधित अपने नवीन शोध प्रस्तुत किए।
आयोजकों के अनुसार सम्मेलन के लिए प्राप्त अनेक शोध पत्रों में से 56 से अधिक शोध पत्रों का चयन प्रकाशन के लिए किया गया है। चयनित शोध पत्रों को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक Springer Nature द्वारा प्रकाशित किया जाएगा तथा यह प्रकाशन Scopus Indexed होगा, जो शोधकर्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
समापन अवसर पर आयोजित वैलेडिक्टरी सत्र में प्रो. (डॉ.) जे. के. मंडल, पूर्व कुलपति, रायगंज यूनिवर्सिटी (पश्चिम बंगाल) ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोध और तकनीकी विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। वहीं विशिष्ट अतिथि एस. एन. महतो, प्रो. देबासिस डे तथा डॉ. गौतम ताती ने प्रतिभागियों को नई तकनीकों पर निरंतर अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर आयोजक संस्था आरटीसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची के प्राचार्य डॉ. एन. हरि बाबू ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को नवीन तकनीकों और शोध की दिशा में कार्य करने की प्रेरणा मिलती है तथा तकनीकी शिक्षा को नई मजबूती प्राप्त होती है। संस्थान के सचिव श्री श्याम नारायण महतो ने भी सम्मेलन के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में आईसीएसीए–2026 के कन्वेनर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव तथा आईईटीई रांची चैप्टर के सचिव प्रो. (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि दो दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों द्वारा प्रस्तुत शोधपत्रों और विचारों से उन्नत कम्प्यूटिंग एवं एप्लीकेशंस के क्षेत्र में नई संभावनाएँ सामने आई हैं, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेंगी।
सम्मेलन के एपेक्स कमेटी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया कि आईसीएसीए–2026 के सफल आयोजन में सरला बिरला यूनिवर्सिटी, रांची के डीन (प्लानिंग एंड डेवलपमेंट) प्रो. विजय कुमार सिंह का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। 6–7 मार्च 2026 को झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सफल संचालन में उनकी सेवाओं और मार्गदर्शन की विशेष सराहना की गई। कमेटी ने कहा कि सम्मेलन के आयोजन में उनका योगदान सभी दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय रहा।
इसके अतिरिक्त इस अवसर पर आईईटीई मुख्यालय, नई दिल्ली द्वारा फोर्थ इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस की सफल आयोजना के लिए विशेष रूप से सम्मेलन के कन्वेनर डॉ. अजय कुमार तथा आईईटीई रांची चैप्टर के सचिव प्रो. (डॉ.) विजय कुमार सिंह को सम्मानित किया गया।
दो दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी सत्रों, शोध पत्र प्रस्तुतियों और विशेषज्ञ व्याख्यानों के माध्यम से प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकी प्रवृत्तियों की जानकारी प्राप्त हुई। वक्ताओं ने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान और नवाचार ही भविष्य की तकनीकी प्रगति का आधार बनेगा तथा ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को और अधिक सशक्त बनाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए सभी के सहयोग की सराहना की।

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