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झारखंड में नौकरी बना जंजाल

बिहार में कार्रवाई झेल चुकी कंपनियों को झारखंड में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी मिलने का दावा, जांच पर उठे सवाल

JPSC-JSSC परीक्षा संचालन पर बड़ा सवाल, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से जुड़ा कनेक्शन सामने आया

 

बिहार में कार्रवाई झेल चुकी कंपनियों को झारखंड में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी मिलने का दावा, जांच पर उठे सवाल

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC की कई परीक्षाओं को लेकर विवाद के बीच परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, Binsys Technologies Pvt. Ltd. को झारखंड में OMR आधारित झारखंड डिप्लोमा लेवल संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2021 के संचालन का काम मिला था। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप में जुलाई 2022 में प्राथमिकी दर्ज हुई और बाद में कंपनी की empanelment निलंबित की गई।

मामले में झारखंड हाईकोर्ट के 26 जून 2025 के फैसले में यह भी दर्ज है कि ब्लैकलिस्टिंग आदेश में पुलिस की ओर से कंपनी के तत्कालीन पूर्व निदेशक अरुण कुमार और निदेशक अजीत कुमार के एक कथित संपर्क का उल्लेख किया गया था। हालांकि कंपनी ने अदालत के समक्ष अपने या अपने निदेशकों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने से इनकार किया था।

ICN India पर भी बिहार में कार्रवाई का रिकॉर्ड

पटना हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, ICN (India) Pvt. Ltd. को बिहार में कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा काम मिला था। कंपनी को 2020 में ब्लैकलिस्ट किया गया था और इसके खिलाफ बाद में भी न्यायिक कार्यवाही हुई।

अदालती रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि अरुण कुमार ICN India के निदेशक रहे और बाद में उन्होंने कंपनी का प्रबंधन संभाला था।

फरवरी 2026 के पटना हाईकोर्ट के एक आदेश में भी दर्ज है कि BINSYS Technologies ने ICN India को खरीदा था और BINSYS के ब्लैकलिस्ट किए जाने का उल्लेख न्यायालय के रिकॉर्ड में मौजूद है।

अब जांच का दायरा और बड़ा होने की जरूरत?

JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों की चयन प्रक्रिया, उनकी पूर्व पृष्ठभूमि, ब्लैकलिस्टिंग रिकॉर्ड और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि किसी एजेंसी का पूर्व रिकॉर्ड विवादित या जांच के दायरे में रहा हो, तो उसे झारखंड में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी किस प्रक्रिया के तहत दी गई?

इस पूरे मामले में दस्तावेजों और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की स्वतंत्र जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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