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Parliament Monsoon Session Live: ‘हम भूलेंगे नहीं… पैलेट गन और लड़कियों पर अत्याचार’, पेपर लीक पर गौरव गोगोई ने सरकार को घेरा

लोकसभा में एक दिन पहले पीएमओ में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया था. हालांकि, इस बिल पर चर्चा की शुरुआत नहीं हो सकी थी. विपक्षी सदस्य चर्चा शुरू करने से पहले गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर अड़े हुए थे. एंटी पेपर लीक बिल पर आज लोकसभा में चर्चा हो रही है.
लोकसभा में इस बिल पर चर्चा के लिए पहले छह घंटे का समय तय किया गया था. विपक्ष ने समय दो घंटे बढ़ाने की मांग की. इस पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम 10 घंटे भी चर्चा के लिए तैयार हैं. इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने हाउस का सेंस लिया और फिर यह ऐलान कर दिया कि एंटी पेपर लीक बिल पर 10 घंटे चर्चा होगी.
अगर ये सिद्धांत की लड़ाई, तो सिद्धांत सरकार देख बदल कैसे जाता है- बांसुरी स्वराज
बांसुरी स्वराज ने कहा कि बहस नैरेटिव और पूर्वाग्रह नहीं, तथ्यों पर होनी चाहिए. उन्होंने पेपर लीक आरोपियों को बेल का बचाव करते हुए कहा कि बेल सरकार नहीं, कोर्ट देती है और लोकतंत्र में न्यायपालिका स्वतंत्र है. बांसुरी स्वराज ने यूपीए सरकार से लेकर राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक, पेपर लीक और नियुक्तियों में धांधली के आंकड़े गिना विपक्ष को घेरा. हाल ही में पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर के एग्जाम में हाईटेक ब्लूटूथ का इस्तेमाल किया गया. विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि यह अगर सिद्धांत की लड़ाई है, तो सिद्धांत सरकार देखकर बदल कैसे जाता है. क्या गौरव गोगोई ने पंजाब के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा अभी तक मांगा है या नहीं.
एंटी पेपर लीक बिल पीएम मोदी की सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण- बांसुरी स्वराज
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि इस बिल को लाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है. पीएम मोदी ने कहा है कि पेपर लीक एक घोर अपराध है. मोदी जी के लिए ऐसा कहना केवल एक बयान नहीं, उनकी सरकार की नीयत है. इसीलिए यह बिल यहां लाया गया है. आज परीक्षा माफिया संगठित हो गया है. यह बिल ज्यूडिशियरी की उलझन को सुलझाता है. इस बिल में जांच के लिए केंद्र सरकार को टास्क फोर्स बनाने का अधिकार है. मैं खुद एक वकील हूं. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को बधाई देती हूं. पीएम मोदी ने परीक्षा पर चर्चा करके अपने व्यक्तिगत समय का निवेश किया है बच्चों में. उनका प्रयास रहा है कि हमारे देश का बच्चा एग्जाम वरियर से एग्जाम वॉरियर बन जाए. उन्होंने आईआईटी से मेडिकल इंस्टीट्यूट तक, बांसुरी स्वराज ने मोदी सरकार में बढ़ी संख्या गिनाईं और एससी-एसटी छात्रों के नामांकन बढ़ने का उल्लेख किया और कहा कि यह सामाजिक न्याय का विस्तार है.
गौरव गोगोई ने प्रोटेस्ट के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख किया और कहा कि डर गायब हो गया. लोग 20 जुलाई की रात 10 बजे प्रोटेस्ट में पहुंचे, कि मैं भी एक लाठी खा लूंगा. हमें आपने याद दिलाया कि लोकतंत्र है. खून से लथपथ चेहरे के बावजूद एक लड़का पुलिस को ललकार रहा था. बहुत लोग कहते हैं कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में गलत शब्द भी कहे गए. उन शब्दों का समर्थन नहीं कहा, लेकिन उन शब्दों को भी याद करना चाहिए जो उन बच्चों ने याद दिलाया. वसीम बरेलवी की कविता- उसूलों पर आंच आए, तो टकराना जरूरी है. जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है. पुलिस की लाठी आती है, तो कोई अनजाना सामने आकर लड़की को बचाता है. वह लड़का कहता है कि इसी उंगली से हमने कमल को वोट डाला, आज कमल की पुलिस ने उस उंगली को तोड़ डाला. धन्यवाद देना चाहता हूं कि देशभर से लोगों ने स्विगी के जरिये खाना भिजवाया. वकीलों ने बोला कि लोकतंत्र के साथ यहां पर खड़े हैं. हमने लोकतंत्र की ताकत देखी, वहीं हमने इस सरकार की क्रूरता भी देखी. हमने देखा कि किस प्रकार से पैलेट गन का इस्तेमाल किया, हमने वह भी देखा कि किस तरह से पुलिसकर्मी ने लड़की के गाल पर थप्पड़ मारा. एक बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर हमला किया. हम भूलेंगे नहीं. हम गृह मंत्री का जवाब चाहते हैं. यह बिल इसलिए आया है, क्योंकि आपकी पुलिस इस आंदोलन को कुचल नहीं पाई. बिहार में आपकी पुलिस ने एके-47 का इस्तेमाल किया.
आप शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोगों को आने वाली चुनौतियों के लिए नहीं, अपने दल के लिए वोटर बनाने पर ध्यान दे रहे हो. दिल्ली जाने के लिए देशभर के माता-पिता प्रदर्शन करने के लिए भेज रहे हैं. एक मां ने आशीर्वाद के साथ जंतर-मंतर भेजा. जेएनयू, डीयू कहता है कि आप मत जाओ. ऐसे हम आने वाली चुनौतियों के लिए भारत का निर्माण करेंगे. एक बात पूरे घटनाक्रम से निकलती है, वो ये कि पेनल्टी पनिशमेंट बढ़ाने से शिक्षा नहीं सुधरेगी. धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक सिंबल है, उनके हटने से शिक्षा में सुधार आएगा, इस पर बच्चों को विश्वास नहीं. आज शिक्षा के विषय पर सभी दल-संगठन और इनसे अलग युवा सड़क पर आ गए. क्यों शिक्षा की मांग की, उनकी पीड़ा को समझना चाहिए. किसी का इतना साहस नहीं कि भूख हड़ताल पर रहना, पुलिस की लाठी खाना. ये साहस आता है दर्द से, जिसमें भविष्य को लेकर वह विवश है. सरकार से सवाल भी नहीं पूछ सकते. एक व्यक्ति ने इस पूरे दर्द के बारे में बात करते हुए गोपालदास नीरज की बात की. ‘कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे…’ सुनाते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि आज देश की स्थिति ये है कि आत्महत्या हुई, क्योंकि बच्चा परीक्षा में फेल हो गया. छात्रों की आत्महत्या एक लाख से अधिक हो गई. दो हजार ने साफ कहा कि फेल हो गया. इसके बाद भी युवा आए.
एनटीए में 34 सैंक्शन पद, 47 पर एक्शन कैसे- गौरव गोगोई
गौरव गोगोई ने कहा कि व्यापक चर्चा की बजाय प्रधानमंत्री कहते हैं- इंस्टाग्राम पर और ध्यान दो. प्रधानमंत्री जब आते हैं, हाईपावर कमेटी के गठन की बात करते हैं, तो दो साल पहले राधाकृष्णन कमेटी का क्या हुआ. वास्तव में बढ़िया काम किया, तो दो साल बाद ही क्यों पेपर लीक हुआ. सरकार दिखाना चाहती है कि बहुत गंभीर है. एनटीए के 47 लोगों को बदला गया. कौन हैं वो, सरकार से ब्यौरा चाहूंगा. एनटीए की सैंक्शन कैपेसिटी है वो 34 है. ये 47 कौन हैं. 34 में से 10-12 वैकेंसियां हैं, 47 कौन हैं. एनटीए के डीजी को बदला, चेयरमैन को रखा. ऐसा क्यों. एनटीए के चेयरमैन पर इतना विश्वास क्यों, उनका ब्यौरा देख लीजिए. एक विशेष संगठन से जुड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के भी चेयरमैन थे, वहां भी धांधली हुई. आपकी सरकार बचा रही है. आज भी वो चेयरमैन बचा हुआ है, क्योंकि वह एक विशेष संघ से जुड़ा हुआ है. शिक्षा विभाग में आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि आरएसएस के लिए शिक्षा विभाग बहुत महत्वपूर्ण विभाग है. इसीलिए वीसी से लेकर फैकल्टी में, यूनिवर्सिटीज में क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
ये कानून आपकी विफलता का स्मारक- गौरव गोगोई
गौरव गोगोई ने असम बाढ़ और 70 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए असम के लिए विशेष पैकेज की मांग की. उन्होंने बिल पर बोलते हुए कहा कि इस बिल से साफ पता चल जाता है कि सरकार सुधार नहीं लाना चाहती. ये बिल सिर्फ दिखावे का बिल है. क्योंकि ये सिर्फ एक संशोधन बिल है. दो साल पहले ये बिल लाते समय भी ऐसे ही दावे किए गए थे. 2026 में एक अखबार में आर्टिकल आया कि 2024 नीट पेपर लीक में चार्जशीटेड हुए 46 में से 44 को बेल मिल चुकी है. संजीव मुखिया 11 महीने फरार था, जिसे मास्टरमाइंड कहा जाता है. गिरफ्तार हुआ, तो उसे उस मामले में बेल मिल गया. एक दूसरे व्यक्ति अमित कुमार बरुआ, अमित कुमार सिंह को बेल मिल गया. उन्होंने एक-एक आरोपी के नाम लेकर बेल वाली लिस्ट गिनाई और कहा कि ये कानून उस समय भी विफल था, जिस मंशा से आज ला रहे हैं आज भी विफल होगा. ये कानून आपकी विफलता का स्मारक है.
पेपर लीक में वारदात से फैसले तक, 5 महीने से ज्यादा नहीं लगेगा समय- जितेंद्र सिंह
डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि हम स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर स्पीडी जस्टिस का प्रावधान इस संशोधन के जरिये कर रहे हैं. इसमें भी हमने समयसीमा तय कर दी है कि जांच दो महीने के भीतर सारी जांच मुकम्मल की जाएगी और उसके बाद जो भी ट्रायल कोर्ट होगा, उसमें तीन महीने. जिस दिन वारदात हुआ है, उस दिन से निर्णय आने तक, पांच महीने से ज्यादा समय नहीं लगेगा. उसके बाद कोई अपील करना चाहे, तो 30 दिन के भीतर कर सकेगा और डबल बेंच से नीचे हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होगी. महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आए हैं, सरकार की प्रतिबद्धता का इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि बिल लाने के साथ ही साथ कानून मंत्री की ओर से प्रस्ताव जारी कर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन भी शुरू कर दिया गया है. उन्होंने नंदन नीलेकणि की अगुवाई में टास्क फोर्स के गठन का भी उल्लेख किया और कहा कि राधाकृष्णन कमेटी की मोटी-मोटी 46 सिफारिशों में से 35 को लागू कर दिया गया है. सरकार की नीति ईमानदार है और ये संशोधन भी ईमानदाराना प्रयास के तहत लाया जा रहा है. इन प्रस्तावों से किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी और अगर हुई, तो देश की जनता को उनसे आपत्ति होगी.
‘परीक्षाओं में पहले भी लीक होते रहे पेपर’, जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस को घेरा
डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग परीक्षाओं में पेपर लीक होते रहे. पेपर लीक किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, लेकिन शायद उस तरह की कार्यवाही नहीं की गई जैसी अब की जा रही है. उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती पेपर लीक से 2012 के एम्स एंट्रेस पेपर लीक तक, कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक गिनाए और कहा कि इसीलिए सोचा गया कि अब इसे लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए. भारत में चार प्रमुख परीक्षा एजेंसियां हैं. 1992 में जब सरकार कांग्रेस की थी, एक कमेटी ने सुझाव दिया था केंद्रीय परीक्षा कमेटी के गठन का. 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसा ही सुझाव दिया था. कांग्रेस और यूपीए की सरकारों ने सुझाव नहीं माने. हमने एनटीए का गठन किया. पहली बार 2024 में यह बिल लाया गया. जून 2024 में लागू किया गया. इस विधेयक के जो मूल उद्देश्य थे, वह परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना था. जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें 2024 के बिल को और मजबूत करने की जरूरत है. हम इसी कानून में संशोधन के लिए बिल लाए हैं.
‘आज का दिन महत्वपूर्ण…’, एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा की शुरुआत से पहले बोले स्पीकर
स्पीकर ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए महत्वपूर्ण है, जब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इस बिल पर चर्चा के लिए सहमत हुए. इस बिल का उद्देश्य लोक परीक्षाओं को और अधिक शुचितापूर्ण बनाना है. परीक्षा प्रणाली की विशिष्टता और पारदर्शिता राष्ट्रहित का महत्वपूर्ण विषय है. पूरा देश चाहता है कि सभी सदस्य सार्थक विचार साझा करें और रचनात्मक विचार रखें, जिससे हम एक बेहतर कानून बना सकें. कानून जितना बेहतर होगा, हम परीक्षा प्रणाली को उतना ही शुचितापूर्ण बना सकते हैं.




