
गुरुपूर्णिमा उत्सव में गूंजा भारतीय ज्ञान परंपरा का संदेश
‘गुरु की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करना ही महर्षि वेदव्यास के प्रति सच्ची श्रद्धा’ : डॉ. रंजीत मिश्रा 
रांची, 29 जुलाई। भारतीय शिक्षण मंडल, झारखण्ड प्रांत एवं आर.टी.सी. बीएड महाविद्यालय, बूटी, रांची के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को गुरुपूर्णिमा (व्यास पूजा) उत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, माँ सरस्वती एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित गीत, संगीत एवं गुरु वंदना नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रवर्तक महर्षि वेदव्यास को नमन करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर.टी.सी. बीएड महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रिचा पद्मा ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के आधार हैं। उन्होंने कहा कि गुरुपूर्णिमा अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का श्रेष्ठ अवसर है।
मुख्य अतिथि आर.टी.सी. कॉलेज के निदेशक डॉ.
रुद्र नारायण महतो ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि चरित्रवान, संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता एवं भारतीय शिक्षण मंडल, झारखण्ड प्रांत के अध्यक्ष डॉ. रंजीत मिश्रा ने कहा कि “गुरु की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करना ही महर्षि वेदव्यास जी के प्रति सच्ची श्रद्धा है।” उन्होंने महर्षि वेदव्यास के ज्ञान, दर्शन एवं भारतीय संस्कृति में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल भारतीयता आधारित शिक्षा के माध्यम से इस महान ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
विशिष्ट अतिथि एवं भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांत मंत्री डॉ. सुबास साहु ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल शिक्षा में भारतीयता, नैतिक मूल्यों एवं सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन के लिए सतत कार्यरत है और गुरुपूर्णिमा जैसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में व्यास पूजा समिति की सह-संयोजक डॉ. अर्पणा शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में महाविद्यालय के प्राध्यापक, बीएड एवं डीएलएड के विद्यार्थी, भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में शिक्षाप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।



