
टंडवा में यमदूत बने कोल वाहन, कार को मारी टक्कर
बाल-बाल बचे सवार, फूटा जनता का आक्रोश
टंडवा:चतरा | टंडवा-पिपरवार मुख्य पथ पर तेज़
रफ़्तार कोल वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला दोपहर दो बजे टंडवा ब्लॉक मोड़ के आगे नईपारम के पास का है, जहाँ एक अनियंत्रित और तेज़ रफ़्तार कोल वाहन ने एक कार को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कार में सवार लोग बाल-बाल बच गए,हालांकि उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आने की ख़बर है।
आम जनता के लिए संकट बनी हाइवा कोल ट्रांसपोर्टिंग कम्पनी स्थानीय लोगों के लिए
गोदावरी,पीएनपी,ओसेल,बालाजी जैसे कोल वाहन पब्लिक संडकों को अब ट्रांसपोर्टिंग का साधन नहीं, बल्कि सड़क पर दौड़ते यमदूत बन चुके हैं। राहगीर और आम जनता हर वक्त ख़ौफ़ के साये में जीने को मजबूर है। आए दिन होने वाली इन दुर्घटनाओं से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
एनटीपीसी-कोल माइंस के प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रही जनता:जिला परिषद सदस्य
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल एनटीपीसी और माइंस प्रबंधन की कार्यशैली पर खड़ा होता है।आम्रपाली परियोजना, चट्टी बरियातू और पाण्डु माइंस से हर दिन हजारों टन कोयले की ढुलाई की जा रही है।अरबों का मुनाफा कमाने के बावजूद, अब तक कोल ट्रांसपोर्टिंग के लिए अलग से समर्पित सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है।नतीजा यह है कि जिस संकरी सड़क पर आम जनता चलती है, उसी पर ये भारी-भरकम और बेलगाम कोल वाहन भी मौत बनकर दौड़ते हैं।
बड़ा सवाल है कि आखिर प्रबंधन और जिला प्रशासन को किस बड़ी अनहोनी का इंतज़ार है? मुनाफे की अंधी दौड़ में आम लोगों की जान को दांव पर लगाना कब बंद होगा? अगर समय रहते कोल ढुलाई के लिए अलग रूट नहीं बनाया गया, तो टंडवा की सड़कों पर इसी तरह बेगुनाहों का खून बहता रहेगा और जनता का यह आक्रोश कभी भी उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।




