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JPSC CGL रद्द होने के बाद नया संकट: नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों के भविष्य पर लटकी तलवार?

JPSC CGL परीक्षा रद्द: नौकरी पाने वालों के भविष्य पर भी उठे सवाल

JPSC CGL रद्द होने के बाद नया संकट: नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों के भविष्य पर लटकी तलवार?

रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच सरकार के फैसले ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा रद्द होने से जहां आंदोलनरत छात्रों को बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर उन अभ्यर्थियों के सामने भी भविष्य का संकट खड़ा होता दिख रहा है, जिन्हें इसी प्रक्रिया के बाद नियुक्ति पत्र मिल चुका है और जो आज सरकारी सेवा में कार्यरत हैं।

सवाल सिर्फ परीक्षा रद्द होने का नहीं है, सवाल उन युवाओं के भविष्य का भी है जिन्होंने पूरी प्रक्रिया पर भरोसा करके नौकरी हासिल की। क्या सरकार ने उन कर्मचारियों के लिए भी कोई अलग योजना तैयार की है, जिनके हाथों में नियुक्ति पत्र दिया गया था और जो आज नौकरी कर रहे हैं?

इनमें से हर व्यक्ति को संदेह की नजर से देखना भी उचित नहीं होगा। हर छात्र या अभ्यर्थी ने नौकरी पैसे देकर हासिल नहीं की है। बहुत से युवाओं ने वर्षों की मेहनत, पढ़ाई और उम्मीद के बाद परीक्षा पास की होगी। ऐसे में पूरी व्यवस्था की कथित गड़बड़ियों की कीमत अगर ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को भी चुकानी पड़े, तो यह उनके लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति होगी।

एक तरफ वे छात्र हैं जो कहते हैं कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ, तो दूसरी तरफ वे कर्मचारी हैं जिनके हाथ में सरकार ने नियुक्ति पत्र सौंपा था और जिन्होंने नौकरी शुरू कर दी। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर उनका क्या होगा?

कई परिवारों के लिए सरकारी नौकरी सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत के बाद मिला आर्थिक सहारा होती है। किसी ने उम्र के आखिरी पड़ाव पर नौकरी का सपना पूरा किया, तो किसी ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए इस नौकरी पर भरोसा किया। ऐसे में यदि पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठता है, तो उन कर्मचारियों की चिंता भी सरकार को उतनी ही गंभीरता से सुननी होगी।

सरकार का फैसला पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में हो सकता है, लेकिन न्याय तभी पूरा माना जाएगा जब आंदोलनरत छात्रों के साथ-साथ उन अभ्यर्थियों के भविष्य की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, जिन्होंने बिना किसी गलत तरीके के परीक्षा पास की।

अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं।

परीक्षा रद्द करने का फैसला तो हो गया, लेकिन जिनकी जिंदगी उस परीक्षा के परिणाम से जुड़ चुकी है—उनके भविष्य का फैसला कौन करेगा?

यही सवाल आज हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के मन में गूंज रहा है।

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