रांची के शराब व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा: भारी नुकसान और कड़े नियमों को बताया 'अस्तित्व की लड़ाई'

रांची के शराब व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा: भारी नुकसान और कड़े नियमों को बताया ‘अस्तित्व की लड़ाई’

रांची: रांची जिले के शराब व्यापारियों (RWRA) ने रांची प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजन किया गया जिसमें झारखंड के जिले के तमाम का शराब कारोबारी ने एक साथ अपने आवाज को बुलंद करते हुए,
झारखंड सरकार की नई आबकारी नीतियों और उत्पाद परिवहन शुल्क (ETD) में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन का कहना है कि रांची जिले के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जिससे व्यापारियों के सामने व्यापार बंद करने की नौबत आ गई है।
व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर निम्नलिखित मुख्य बिंदु उठाए हैं:
ETD में विसंगति: रांची जिले के लिए उत्पाद परिवहन शुल्क (ETD) अन्य जिलों की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। व्यापारियों का कहना है कि इस क्षेत्रीय असमानता के कारण उन्हें भारी व्यावसायिक नुकसान हो रहा है।
अवास्तविक राजस्व लक्ष्य: वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए जो राजस्व लक्ष्य तय किए गए हैं, उन्हें हासिल करना लगभग असंभव है। साथ ही, MGQR (न्यूनतम गारंटीकृत मात्रा राजस्व) में 10% की वृद्धि को उद्योग के लिए ‘अंतिम प्रहार’ बताया जा रहा है।
जुर्माने का विरोध: बाजार में सुस्ती के कारण स्टॉक उठाने में देरी हो रही है, लेकिन विभाग इसे समझे बिना भारी जुर्माना लगा रहा है और “M.G.R. लेफ्ट कोटा” को रोक रहा है।
कैंटीन स्टॉक का अवैध रिसाव: व्यापारियों ने आरोप लगाया कि रक्षा कैंटीन (Canteen Stock) का शराब खुले बाजार में अवैध रूप से बिक रहा है, जिससे लाइसेंस प्राप्त खुदरा विक्रेताओं की बिक्री पूरी तरह बर्बाद हो रही है।
तिमाही कोटा प्रणाली की मांग: एसोसिएशन ने मांग की है कि कठोर मासिक कोटे के बजाय ‘तिमाही कोटा प्रणाली’ लागू की जाए, ताकि बाजार की वास्तविक मांग के अनुसार स्टॉक उठाया जा सके।
एसोसिएशन का आधिकारिक बयान:
व्यापारियों का कहना है कि उनके पास करोड़ों रुपये का स्टॉक बिना बिका पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ETD में समानता नहीं लाई गई और राजस्व लक्ष्यों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो उनके लिए काम जारी रखना संभव नहीं होगा। व्यापारियों ने इसे मुनाफे की नहीं, बल्कि अपने ‘अस्तित्व की लड़ाई’ करार दिया है।




