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यूनिसेफ़ के सहयोग से “उमंग दिवस” का राज्य स्तरीय शुभारंभ

यूनिसेफ़ के सहयोग से “उमंग दिवस” का राज्य स्तरीय शुभारंभ

स्थान: आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जमचूआ, नमकुम
दिनांक: 6 मार्च 2026

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) एवं स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत यूनिसेफ़ के सहयोग से “उमंग दिवस” का राज्य स्तरीय शुभारंभ आज आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जमचूआ (नामकुम) से श्री शशि प्रकाश झा, अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में श्री शशि प्रकाश झा, अभियान निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, डॉ मुकेश मिश्रा, राज्य नोडल पदाधिकारी (RBSK), डॉ लाल मांझी, राज्य नोडल पदाधिकारी – गैर संचारी रोग, डॉ पुष्पा, राज्य नोडल पदाधिकारी, प्रशिक्षण कोषांग, डॉ कमलेश, राज्य नोडल पदाधिकारी – SPMU, डॉ विजय किशोर रजक, राज्य नोडल पदाधिकारी – RKSK कार्यक्रम, डॉ प्रभात कुमार, सिविल सर्जन रांची, डॉ कनिनिका मित्रा, चीफ फील्ड ऑफिसर यूनिसेफ – झारखंड, रफत फरजाना, राज्य समन्वयक (RKSK), डॉ वनेश माथुर, हेल्थ ऑफिसर – यूनिसेफ तथा सुश्री जोशीला पल्लापति, SBC स्पेशलिस्ट – यूनिसेफ सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

उमंग दिवस किशोरों (10–19 वर्ष) के लिए एक मासिक सहभागिता मंच है, जिसका उद्देश्य उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी, परामर्श तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। यह मंच किशोरों को सकारात्मक स्वास्थ्य व्यवहार अपनाने, सही निर्णय लेने, सहकर्मी नेतृत्व विकसित करने तथा परिवार और समुदाय में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने के लिए सशक्त बनाता है।

उमंग दिवस का औपचारिक शुभारंभ अभियान निदेशक एवं उपस्थित किशोर-किशोरियों द्वारा आकाश में रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ाकर किया गया, जिसने कार्यक्रम की शुरुआत को उत्साह और उल्लास के साथ चिह्नित किया।

कार्यक्रम के दौरान अभियान निदेशक ने चल रहे उमंग दिवस सत्र का अवलोकन किया तथा उपस्थित किशोरों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), ANM, साहिया एवं समुदाय के सदस्यों से संवाद किया। उन्होंने किशोर स्वास्थ्य जागरूकता, परामर्श एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की सराहना की।

इस अवसर पर अभियान निदेशक ने कहा कि बच्चे अपने घर में बड़ों को देखकर सीखते हैं और उसी से प्रेरित होकर आगे बढ़ते हैं। किशोरावस्था वह समय है जब बच्चों में जिज्ञासा सबसे अधिक होती है और वे स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न पूछते हैं। जो बच्चे अपनी जिज्ञासाओं और प्रश्नों के साथ आगे बढ़ते हैं, वही आगे चलकर जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनते हैं।

उन्होंने कहा कि किशोरियों की शादी 18 वर्ष तथा किशोरों की शादी 21 वर्ष की आयु के बाद ही होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा और आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जैसे समाज में यह धारणा है कि जब लड़का कमाने लगेगा तभी उसकी शादी होगी, उसी प्रकार यह सोच लड़कियों के लिए भी लागू होनी चाहिए। जब लड़कियां पढ़ेंगी, काम करेंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी वे सशक्त बनकर अपना जीवन बेहतर ढंग से जी सकेंगी।

उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना और असंतुलित खान-पान जैसी आदतें कई बीमारियों का कारण बनती हैं, जिनसे हमें बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उमंग दिवस किशोरों को ऐसा मंच प्रदान करता है जहां वे उन विषयों पर भी खुलकर चर्चा कर सकते हैं जिनके बारे में वे अपने माता-पिता से बात करने में संकोच करते हैं।

रफत फरजाना, राज्य समन्वयक (RKSK) ने उमंग दिवस के उद्देश्यों को साझा करते हुए बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य किशोर-किशोरियों में गैर-संचारी रोगों (NCDs) के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर संवाद के लिए एक सुरक्षित मंच प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से किशोरों में निवारक स्वास्थ्य व्यवहारों जैसे स्वच्छता, संतुलित पोषण, शारीरिक गतिविधि तथा नशे के दुरुपयोग की रोकथाम को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही आवश्यकतानुसार परामर्श और रेफरल सेवाओं के माध्यम से उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा।

डॉ कनिनिका मित्रा, चीफ फील्ड ऑफिसर यूनिसेफ – झारखंड ने कहा कि उमंग दिवस के माध्यम से बच्चों को एक ऐसा मंच मिलेगा जहां वे खुलकर अपनी बात रख सकेंगे और अपनी समस्याओं को साझा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि किशोर-किशोरी कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, जिन्हें संवेदनशीलता और समझदारी के साथ मार्गदर्शन देने की आवश्यकता होती है। उनके साथ कभी भी आलोचनात्मक या निर्णायक (Judgemental) व्यवहार नहीं करना चाहिए।

उन्होंने झारखंड की सराहना करते हुए कहा कि यह पहला राज्य है जहां इस तरह का कार्यक्रम शुरू किया गया है, जो आने वाले समय में किशोरों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ इस पहल में आगे भी अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करता रहेगा।

यूनिसेफ से प्रीति श्रीवास्तव ने बच्चों के साथ बाल विवाह की रोकथाम और उसके दुष्प्रभावों पर क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से जानकारी साझा की।

पहले उमंग दिवस सत्र का विषय “किशोरावस्था में शारीरिक बदलाव, गैर संचारी रोग, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण एवं आयरन फोलिक एसिड का महत्व” रखा गया, जिसमें किशोरों को शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दी गई।

उल्लेखनीय है कि झारखंड में 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के किशोर राज्य की आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और स्वास्थ्य संवर्धन एवं रोकथाम के दृष्टिकोण से यह एक अहम आयु वर्ग है। इस आयु वर्ग को एनीमिया, कुपोषण, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, नशे का सेवन, बाल विवाह तथा सही और विश्वसनीय स्वास्थ्य जानकारी तक सीमित पहुँच जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

उमंग दिवस प्रत्येक माह के पहले शुक्रवार को सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों में आयोजित किया जाएगा, जहां किशोर-किशोरियां खुलकर अपनी समस्याओं को साझा कर सकेंगे तथा नई-नई उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

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