Welcome to THE DAINIK AAWAZ 24 NEWS   Click to listen highlighted text! Welcome to THE DAINIK AAWAZ 24 NEWS
Uncategorizedझारखंडटेक्नोलॉजीटॉप न्यूज़राज्यलोकल न्यूज़
Trending

पद्मश्री बलबीर दत्त ने 'कंचन मुक्ति' प्रयोग को बताया अद्भुत परंपरा

 

पद्मश्री बलबीर दत्त ने ‘कंचन मुक्ति’ प्रयोग को बताया अद्भुत परंपरा।

रांची:* आचार्यकुल झारखंड के उपाध्यक्ष आचार्य डॉ. वासुदेव प्रसाद एवं संयोजक डॉ. अरविंद कुमार लाल ने पद्मश्री बलबीर दत्त के आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर उन्होंने आचार्यकुल के विगत प्रांतीय अधिवेशन की जानकारी दी तथा आगामी ‘आचार्यकुल संदेश’ (झारखंड प्रदेश) स्मारिका हेतु शुभकामनाएं प्राप्त कीं। साथ ही आचार्य विनोबा भावे पर सारगर्भित आलेख देने का अनुरोध किया।

 

 

पद्मश्री बलबीर दत्त ने अपने निजी पुस्तकालय में उपलब्ध अपनी चर्चित कृतियों – _कहानी झारखंड आंदोलन की: इतिहास से साक्षात्कार, विनोबा उवाच – मान लिया झारखंड बन गया तो क्या होगा? तथा जयपाल सिंह: एक रोमांचक अनकही कहानी_ – के संदर्भ में विनोबा जी के विचारों को अत्यंत जीवंत ढंग से प्रस्तुत किया।

उन्होंने गांधी जन्मशती के अवसर पर विनोबा जी की उपस्थिति में हिंसा की वकालत जैसे संस्मरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि *आचार्य विनोबा का ‘कंचन मुक्ति’ प्रयोग भारतीय चिंतन की एक अद्भुत और प्रेरणादायी परंपरा है।*

इस अवसर पर आचार्यकुल झारखंड के महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश ने मंगलाचरण के साथ पद्मश्री बलबीर दत्त को रुद्राक्ष भेंट कर सम्मानित किया तथा औपचारिक पत्र सौंपते हुए स्मारिका हेतु शुभकामना संदेश एवं आलेख का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी बताया कि आचार्य विनोबा भावे से संबंधित विद्वानों से संपर्क स्थापित करने के लिए आचार्यकुल का प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही विभिन्न स्थानों का दौरा करेगा।

इसी क्रम में आज ही श्री राम टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के सुरम्य परिसर में आचार्यकुल झारखंड के उपाध्यक्ष आचार्य डॉ. वासुदेव प्रसाद एवं संयोजक डॉ. अरविंद कुमार लाल ने महाविद्यालय के सचिव डॉ. विकास कुमार सिन्हा से औपचारिक भेंट की।

 

इस दौरान महाविद्यालय में *आचार्य विनोबा भावे विचार सेल* के गठन हेतु निवेदन किया गया तथा ‘आचार्यकुल संदेश’ स्मारिका के लिए लेख आमंत्रित करने का आग्रह भी किया गया। दोनों कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं रचनात्मक वातावरण में संपन्न हुए, जिनमें आचार्य विनोबा भावे के विचारों के प्रचार-प्रसार एवं शैक्षणिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!